रेलवे स्टेशन पर फर्जी टिकट घोटाले की जांच के लिए मुख्यालय से एक टीम आने से हड़कंप मचा हुआ है। करीब तीन साल पहले रेल खिड़कियों से फर्जी टिकट बेचने का यह खेल फैजाबाद और अकबरपुर में हुआ था। घोटाला 35 से 40 लाख रुपये के बीच होने का अनुमान है।
सुबूतों के साथ इसकी शिकायत करीब सात माह पहले लखनऊ, दिल्ली और रेल मंत्रालय से की गयी थी। हालांकि ऊंची रसूख रखने वाले एक अधिकारी सहित सात-आठ कर्मियों की नौकरी पर खतरा आया तो शिकायत को ही दबाने का प्रयास शुरू हो गया था।
अब करीब छह माह बाद रेल मुख्यालय से जांच टीम पुराने दस्तावेजों को लेकर यहां पहुंची है। सोेमवार को कईयों से पूछताछ हुई है। सूत्रों के अनुसार, चार सदस्यीय टीम का नेतृत्व कर रहे अधिकारी ने सोमवार को टिकट वितरण करने वाले एक कर्मचारी का बयान लिया।
इसके बाद टीम ने वाणिज्य विभाग के एक अधिकारी से पूछताछ की। जांच में सामने आ रहा है कि सबूत मिटाने के लिए स्टेशन पर मौजूद होने वाले तत्संबंधी सभी दस्तावेज जला दिये गये हैं। लेकिन रेलवे से जुड़े जिस शख्स ने गोपनीय शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है, उसने घोटाले से जुड़े सभी सबूतों की प्रतियां भेज रखी है।
इसी आधार पर फर्जी टिकट का खेल करने वाले प्रमुख कर्मचारियों से अब पूछताछ शुरू हुई है। जांच अधिकारी ने अपना नाम व पद न उजागर करने की शर्त पर कहा कि यह तो तय है कि घोटाला हुआ है। फर्जी टिकट बेचकर रेलवे राजस्व को करीब 35 से 40 लाख रुपये की चपत लगायी गयी है। इसमें सात-आठ लोगों की बर्खास्तगी तय है।