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सेंट्रल लैब में भी मैगी का नमूना फेल, केस

Sun, 08 May 2016 10:34 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/फैजाबाद
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टेस्ट में फ‌िर फेल हुई मैगी - फोटो : Demo
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गोरखपुर लैब के बाद अब नेस्ले इंडिया के उत्पाद मैगी के नमूने में सेंट्रल लैब कोलकाता ने भी गड़बड़ी पाई है। मैगी में मोनोसोडियम ग्लूटामेट पाए जाने की पुष्टि हुई है, जबकि रैपर पर मोनोसोडियम नहीं होने का जिक्र है। मामले में एफएसडीए के अभिहीत अधिकारी ने एडीएम सिटी की कोर्ट में नेस्ले इंडिया, डिपो नारायण डिस्ट्रीब्यूटर और उसके नॉमिनी मयंक दुबे पर मुकदमा दायर किया है।
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नारायण डिस्ट्रीब्यूटर से आठ मई 2015 को मैगी के दो नमूने लिए गए थे। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी रत्नाकर पांडेय ने 280 ग्राम पैकेट और खाद्य सुरक्षा अधिकारी सूर्यमणि ने 70 ग्राम के पैकेट का एक-एक नमूना भरा था।

वहीं खाद्य सुरक्षा अधिकारी विवेक कुमार ने रुदौली कस्बे की श्याम एजेंसी से मैगी के 70 ग्राम पैकेट का एक नमूना लिया था। तीनों नमूने जांच के लिए खाद्य एवं औषधि प्रयोगशाला गोरखपुर भेजे गए, जहां से 10 जुलाई 2015 को आई रिपोर्ट में गड़बड़ी की पुष्टि की गई।
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खाद्य एवं औषधि विभाग के अभिहीत अधिकारी वीके पांडेय ने बताया कि शासन की अनुमति से 18 जनवरी 2016 को केंद्रीय प्रयोगशाला कोलकाता को दोबारा मैगी का नमूना जांच के लिए भेजा गया। कोलकाता लैब से 2 मई 2016 को भेजी गई रिपोर्ट में रैपर पर दर्ज निर्माण संबंधी फार्मूले में मिथ्या सूचना की पुष्टि हुई है।

रिपोर्ट में नेस्ले की मैगी में मोनोसोडियम ग्लूटामेट पाए जाने की पुष्टि की गई है, जबकि रैपर पर मोनोसोडियम के नहीं डाले जाने का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट आते ही नेस्ले कंपनी के साथ उसके डिपो होल्डर नारायण डिस्ट्रीब्यूटर और उसके नामिनी मयंक दुबे पर सात मई को एडीएम सिटी के न्यायालय में खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत मुकदमा दायर कर दिया गया है। बताया कि रुदौली की श्याम एजेंसी से लिया गया मैगी का एक नमूना भी फेल हो गया है। श्याम एजेंसी पर मुकदमा चलाने के लिए शासन से अनुमति मांगी गई है।

जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन नानक सरन कहते हैं कि मोनोसोडियम ग्लूटामेट एक साल तक के बच्चों को बिल्कुल भी नहीं दिया जाना चाहिए। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। बच्चे ज्यादा खाने लगते हैं, इससे उनके लिवर पर असर पड़ता है। यह ऐसा तत्व है जो कृत्रिम रूप से मैगी के स्वाद को बढ़ा देता है। यही कारण है कि बच्चे इसे चाव से अधिक खाते हैं।
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