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अजय शुक्ला हत्याकांड की जांच उलझी

Sun, 27 Dec 2015 10:14 PM IST
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
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अजय शुक्ला हत्याकांड की पहेली सुलझने से पहले फिर उलझ गई है। पहले पुलिस ने खुद तमंचे से गोली मार कर आत्महत्या की कहानी बनाई थी। हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद जिले की क्राइम ब्रांच ने तमाम तथ्य और सबूत जुटाए, फिर चार आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। मगर डीआईजी ने बाकी पांच आरोपितों की धर-पकड़ से पहले मामला बाराबंकी क्राइम ब्रांच को सौंप दिया है। मृतक के पिता ने शनिवार को तथ्यों और सबूतों के साथ मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव गृह और डीजीपी से की गई शिकायत में डीआईजी पर हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना और अभियुक्तों से कांटेक्ट विथ डील के आरोप लगाए हैं।
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जिले के इनायतनगर थाना क्षेत्र के मवईकला गांव में 4 जुलाई 2015 की रात प्रेमिका के जरिए अजय को घर बुलाकर हत्या की गई थी। अजय खंडासा थाना क्षेत्र के गहनाग निवासी राधेरमण शुक्ला का छोटा पुत्र था। राधेरमण सीतापुर में नौकरी करते हैं और परिवार भी साथ रहता है।

मुख्यमंत्री समेत उच्चाधिकारियों से की गई शिकायत में राधेरमण शुक्ला का कहना है कि उनके मझले लड़के संजय कुमार की मवई कला निवासी स्व. सुरेंद्र कुमार तिवारी की लड़की आरती के साथ शादी हुई है।
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इसी संबंध से मेरा छोटा लड़का अजय कुमार शुक्ला मवई कला आता-जाता था। स्व. सुरेंद्र के पुत्र सुनील कुमार की मौत भी उनके जीवन काल में हो गई थी। सुनील की दो पुत्रियां कु. शिखा (22) व शिल्पी (17) हैं।

शिखा का संबंध मेरे पुत्र अजय से हो गया था जिसे विपक्षीगण पसंद नहीं करते थे। इन लोगों ने 4 जुलाई को घर गहनाग गांव अजय को फोन कर बुलाया और राजश्री रानी पत्नी स्व. सुनील कुमार के घर पर गोली मारकर रात में हत्या कर दी।

मौत की सूचना मिलने पर सुबह सीतापुर से मौके पर गया और हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई। मामले में शिखा और अजय का एक-दूसरे को लिखा हुआ कई प्रेमपत्र सौंपा, एक पत्र में बेटे को घर बुलाने की बात थी। मोबाइल पर बातचीत की रिकॉर्डिंग भी पुलिस को सौंपी, लेकिन पुलिस मामले को आत्महत्या की ओर ले जा रही थी।

थक-हार कर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के लखनऊ बेंच में याचिका दायर की। जिस पर एसएसपी को अपनी निगरानी में जांच का आदेश हुआ। पर्याप्त प्रगति न होने पर मिसलिनियस प्रार्थना पत्र दिया, हाईकोर्ट के सख्त रुख से 17 नवंबर को एसएसपी पूरी क्राइम ब्रांच टीम के साथ कोर्ट में हाजिर हुए।

इसके बाद शिखा, शिल्पी, राजश्री और रत्नेश को 26 नवंबर को गिरफ्तार किया गया। शेष आरोपितों की तलाश शुरू हुई। इसी बीच 28 नवंबर को रत्नेश के बड़े भाई सुल्तानपुर निवासी बृजेश कुमार पांडेय की दरखास्त पर डीआईजी ने मामले को बाराबंकी क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दिया।

मृतक के पिता ने डीआईजी वीके गर्ग पर हाईकोर्ट के आदेश का अवमानना समेत दबाव में आरोपितों से कांटेक्ट विथ डील करने के कई गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले में सख्त कार्रवाई के साथ उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

दबाव में नहीं मेरिट पर बदली जांच : डीआईजी
किसी दबाव का सवाल नहीं है। मैंने मेरिट पर मामला बाराबंकी क्राइम ब्रांच को स्थानांतरित किया है। हाईकोर्ट का क्या आदेश इसे मैंने नहीं देखा है। पहले भी इनायतनगर पुलिस ठीक से जांच नहीं कर रही थी तो मामला फैजाबाद क्राइम ब्रांच को दिया गया था। फैजाबाद क्राइम बांच के जांच की मेरिट देखी तो ठीक नहीं लगा। लिहाजा बाराबंकी क्राइम ब्रांच को केस दे दिया है। अब मामले में बाराबंकी क्राइम ब्रांच के प्रभारी संबंधित क्षेत्राधिकारी से भी जांच सही दिशा में हो, इसकी रिपोर्ट मांग रहा हूं। वैसे डीजीपी के यहां हुई शिकायत पर जो आदेश आएगा, उसका पालन होगा।- वीके गर्ग, डीआईजी फैजाबाद

कोर्ट खुलते ही करेंगे याचिका
मृतक के पिता राधेरमण शुक्ला का कहना है कि पुलिस की भूमिका घटना के बाद से आरोपियों को बचाने वाली रही है। मौके पर बिखरे खून, आलू में छिपाए गए तमंचा की बरामदगी समेत काल डिटेल, रिकॉर्डिंग, प्रेमपत्र आदि तमाम सबूत देख हाईकोर्ट ने सख्त आदेश दिए थे। अब डीआईजी के जांच बदलने के आदेश के खिलाफ फिर कोर्ट खुलते ही अपील करेंगे। डीआईजी के रहते जांच सही दिशा में नहीं हो सकती है।
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