भवानीफेर हत्याकांड में चार लोगों को आजीवन कारावास की सजा
फैजाबाद। इनायतनगर थाने के बहुचर्चित भवानीफेर हत्याकांड में 22 साल बाद फैसला आया तो चार लोगों को आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। प्रत्येक पर 50 हजार 500 रुपये जुर्माना भी हुआ। इसमें आपराधिक षड़यंत्र के आरोपी रहे पूर्व मंत्री आनंदसेन को कोर्ट ने संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया। मामले में विचारण के दौरान ही सांसद मित्रसेन यादव समेत तीन आरोपियों की मौत हो चुकी है। यह फैसला अपर जिलाजज हरिनाथ पांडेय की कोर्ट से बुधवार को हुआ। फैसले के वक्त पूरी अदालत खचाखच समर्थकों से भरी रही।
अधिवक्ता सईद खान ने बताया कि घटना 24 जून 1996 की है। इनायतनगर थानाक्षेत्र के निमड़ी पूरे बख्शी गांव में छह हथियारबंद लोगों ने इसी गांव के भवानीफेर यादव की ताबड़तोड़ गोली मारकर हत्या कर दी थी। उसका भतीजा ओम प्रकाश बचाने आया तो, उसे भी गोली मारी गई। इसकी रिपोर्ट निमड़ी गांव के राम सेवक, साईंचरन, भगवंत प्रसाद, राम सुमेर, शोभनाथ व जग प्रसाद के खिलाफ हत्या व जानलेवा हमले में लिखाई गई। बाद में मित्रसेन व उनके पुत्र आनंदसेन यादव के खिलाफ आपराधिक षड़यंत्र का आरोप लगा। कोर्ट ने दोनों को विचारण के लिए तलब किया। मामले की शुरुआती विवेचना इनायतनगर पुलिस ने की। बाद में आरोपियों की अर्जी पर विवेचना सीबीसीआईडी को स्थानांतरित की गई। विवेचना के बाद छह नामजद लोगों के खिलाफ आरोपपत्र कोर्ट में प्रस्तुत किया गया। दौरान मुकदमा मित्रसेन यादव, भगवंत व जग प्रसाद की मौत हो गई, बचे लोगों में से चार निमड़ी गांव के राम सेवक, साईंचरन, राम सुमेर व शोभनाथ को कोर्ट ने आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। प्रत्येक पर 50 हजार 500 रुपये जुर्माना भी हुआ। पूर्व मंत्री आनंदसेन को दोषमुक्त कर दिया। घटना के पीछे रंजिश यह थी कि घटना के पूर्व भवानीफेर और आरोपी भगवंत लड़े थे। इसमें भगवंत जीत गए। जीतने के बाद से दो बार हमला करके दूसरी बार भवानी फेर की हत्या कर दी। इसके पूर्व की घटना में भी हमलावरों को सात साल की सजा हो चुकी है।
सीडी और तहरीर दोनों गायब कर दी गई
फैजाबाद। मामले में विलंब करने और सजा से बचने के हर प्रयास किए गए। हालांकि कोर्ट और वादी के अधिवक्ता की सतर्कता से यह प्रयास फलीभूत नहीं हुए। सीबीसीआईडी की विवेचना की सीडी ही गायब कर दी गई। फिर इसका पुनर्निर्माण किया गया। इसके बाद मामले की मूल तहरीर ही फाइल से गायब कर दी गई। इसकी जांच हुई फिर इसका भी पुनर्निर्माण करके विचारण किया गया तब जाकर सजा हुई, लेकिन इस बीच तीन आरोपियों की मौत हो गई।