मवई (अयोध्या)। पिछले विधान सभा चुनाव में निर्दल प्रत्याशी और हिस्ट्रीशीटर बृजेश सिंह उर्फ विरंजन सिंह (30) की बृहस्पतिवार सुबह गोली मारकर हत्या कर दी गई। मवई थाना क्षेत्र के बघेड़ी तालगांव संपर्क मार्ग पर उसका शव पड़ा ग्रामीण भड़क गये। पुलिस ने वहां से शव उठावा लिया तो ग्रामीणों ने लखनऊ-अयोध्या हाईवे जाम कर दिया।
दो घंटे तक किसी जिम्मेदार अधिकारी के न पहुंचने पर भीड़ ने हिंसा पर उतारू हो गई। उसने सड़क पर टायरों में आग लगा दी और तीन सरकारी बसों से यात्रियों को उतारकर उन्हें आग के हवाले कर दिया। बाद में पुलिस ने लाठीचार्ज और रबर की गोलियां चला कर लोगों को वहां से खदेड़ा। उपद्रव के चलते दो घंटे हाई-वे जाम रहने से दोनों ओर 15-15 किमी. लंबा जाम लग गया।
भीड़ ने हाईवे पर खड़े कई चार पहिया वाहनों में भी तोड़फोड़ की। इस दौरान मौके पर महज चार पुलिसकर्मी मौजूद थे। जिन्होंने आक्रोशित भीड़ को रोकने का प्रयास किया तो भीड़ ने उन्हें वहां से खदेड़ दिया। सवा दो घंटे बाद 12:15 पर एसपी ग्रामीण शैलेंद्र कुमार सिंह, सीओ धर्मेंद्र यादव भारी पुलिस व पीएसी बल के साथ मौके पर पहुंचे तब भीड़ ने पुलिस बल पर ईंट-पत्थर भी चलाए। जिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया और रबर की गोलियां भी चलाई। जिसके बाद भीड़ वहां से भाग खड़ी हुई।
सूचना पर रामसनेहीघाट से पहुंचीं दमकल की गाड़ियों जल रही बसों की आग बुझाई। एनएचआई की टीम ने क्रेन से सभी बसों को हाईवे से बाहर हटवाकर यातायात बहाल करवाया। मामले में गांव के ही चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।
वारदात की जानकारी सबसे पहले गुरुवार सुबह करीब 7 बजे स्कूल जा रही एक बस के चालक ने दी। उसने ग्राम तालगांव के बघेड़ी तालगांव संपर्क मार्ग पर लहूलुहान युवक को पड़े देखा। सूचना पर पहुंचे ग्रामीणों ने शव की पहचान बघेडी गांव निवासी बृजेश सिंह उर्फ विरंजन सिंह (30) के रूप में की। उसकी बाइक सड़क पर दूसरी तरफ और शव अलग पड़ा मिला।
पुलिस के अनुसार पहले से घात लगाकर बैठे हत्यारों ने पहले उसे यूकेलिप्टस के दो मोटे डंडों के सहारे रोका और फिर उनके सिर पर गोली मार दी। इससे उसका सिर क्षत विक्षत हो गया व शरीर पर भी चोट के काफी निशान थे। गांव के चौकीदार की सूचना पर मवई थाना प्रभारी विनोद कुमार, पटरंगा थाना प्रभारी संतोष कुमार सिंह और रुदौली कोतवाली प्रभारी विश्वनाथ यादव मौके पर दलबल के साथ पहुंचे।
पुलिस ने लोगों की बढ़ती भीड़ को देखकर शव को कब्जे में लेकर आनन फानन उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इससे ग्रामीणों में नाराजगी फैली। इसी बीच मृतक विरंजन के दरवाजे पर पहुंचे रुदौली विधायक रामचंद्र यादव को ग्रामीणों व परिवारीजनों ने खदेड़ लिया, जिससे उन्हें बैरंग लौटना पड़ा।
विरंजन सिंह के भाई जिला पंचायत सदस्य राजू सिंह ने बताया कि बुधवार को उनका भाई घर से अपराह्न करीब तीन बजे निकला था। रात करीब 10 बजे घर वालों से फोन पर बात हुई तो उन्होंने कहा कि तालगांव में हूं बस थोड़ी देर में घर पहुंच रहा हूं।
उन्होंने आरोप लगाया है कि गांव के ही शिवप्रसाद, बासुदेव व रजनपुर गांव के द्वारिका व उमेश आदि ने उनके भाई की हत्या की है। बताया कि कुछ दिन पहले वासुदेव और शिव प्रसाद से उनके भाई से किसी बात को लेकर नोकझोंक हुई थी, उसके बाद से उन्हें कई बार घेरने की कोशिश भी हुई। एसएसपी जोगेंद्र कुमार ने बताया कि मृतक के भाई राजू सिंह की तहरीर पर चार नामजद लोगों पर हत्या का केस दर्ज कर उनकी तलाश की जा रही है।
उधर, मवई थाना क्षेत्र के बघेडी गांव निवासी विरंजन सिंह का आपराधिक इतिहास काफी लंबा है। सबसे पहला मुकदमा पटरंगा थाना में वर्ष 2005 में अवैध असलहा रखने का दर्ज हुआ। उसके बाद वर्ष 2006 में अमेठी जिले के शिवरतनगंज थाने में जानलेवा हमला का केस, वर्ष 2007 में ईंट गुम्में चलाने व अवैध असलहा के साथ बवाल का, 2007 में मवई थाना में जानलेवा हमले का, मवई थाना में ही वर्ष 2009 में दो अलग-अलग केस, 2013 में रुदौली का बहुचर्चित मोल्हे हत्याकांड में केस दर्ज हुआ था।
इसके बाद रुदौली पुलिस ने उस पर 2014 में गैंगस्टर की कार्रवाई की। हालांकि पिछले वर्ष कोर्ट में हत्याकांड मामले में उसे बरी कर दिया है। वर्ष 2014 में ही बाराबंकी जिले के असंदरा थाना में जानलेवा हमला के आरोप में भी केस दर्ज हुआ था। बताया जाता है कि हत्या में आरोपी चारों लोग उसके पुराने साथी है। उनका भी आपराधिक इतिहास है।
वहीं, मवई के कई गांवों में जमीनी पकड़ रखने वाला विरंजन सिंह वर्ष 2012 में अमर सिंह की पार्टी राष्ट्रीय लोकमंच से विधानसभा का चुनाव लड़ चुका है। हालांकि उस चुनाव में उसे मात्र 3570 मतों से संतोष करना पड़ा। उसके बाद वर्ष 2015-16 के पंचायत चुनाव में मवई द्वितीय से जिला पंचायत सदस्य के रूप में अपने छोटे भाई राजू सिंह को और अपने मित्र राजू रावत को मवई तृतीय से मैदान में उतारा और जीत हासिल की। इस बीच खुद ब्लॉक प्रमुख के चुनाव की तैयारी में जुटा रहा और अपनी पत्नी ममता सिंह को बीडीसी का चुनाव जिताया। बाद में ब्लॉक प्रमुख के चुनाव से पीछे कदम खींच लिया।
शव मिलने के बाद से ही गांव में एकत्र लोगों के अंदर गुस्सा सुलग रहा था। इसका आभास पुलिस को हो चुका था, इसके बाद भी पुलिस ने ऐहितयातन कोई कदम नहीं उठाया। वहीं, सूत्रों के अनुसार हाईवे जाम की सूचना एसपी ग्रामीण शैलेंद्र कुमार को करीब साढ़े दस बजे ही दे दी गई थी, जिस पर उन्होंने पुलिस व पीएसी को आधे घंटे में भेजने की बात कही थी।
उनके आश्वासन के दो घंटे बाद पुलिस के पहुंचने तक बहुत देर हो चुकी थी। सवा दो घंटे बाद 12:15 पर एसपी ग्रामीण शैलेंद्र कुमार सिंह, सीओ धर्मेंद्र यादव भारी पुलिस व पीएसी बल के साथ मौके पर पहुंचे तब भीड़ ने पुलिस बल पर ईंट-पत्थर भी चलाए। जिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया और रबर की गोलियां भी चलाई। जिसके बाद भीड़ वहां से भाग खड़ी हुई।
सूचना पर रामसनेहीघाट से पहुंचीं दमकल की गाड़ियों जल रही बसों की आग बुझाई। एनएचआई की टीम ने क्रेन से सभी बसों को हाईवे से बाहर हटवाकर यातायात बहाल करवाया। मामले में गांव के ही चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।
वहीं बवाल शांत होने के बाद डीएम अनुज कुमार झा, एसएसपी जोगेंद्र कुमार, एसपी ग्रामीण शैलेंद्र कुमार, रुदौली एसडीएम ज्योति सिंह पहुंचे और घटना की जानकारी ली। सीओ धर्मेंद्र यादव ने बताया कि हाईवे पर हुए बवाल की जांच की जाएगी, दंगा करने वालों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जाएगी।
हाईवे पर लगे जाम के दौरान फंसें यात्री व एंबुलेंस के मरीज परेशान नजर आए। दूसरी ओर जलाई गई तीनों बसों के करीब डेढ़ यात्री दूसरे साधन के इंतजार में भटकते नजर आए। बुजुर्ग, महिलाएं, छोटे छोटे बच्चे चिलचिलाती धूप में परेशान भटकते रहे।