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हत्या का केस वापस लेने के लिए किया था दीपांशु का अपहरण

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हत्या का केस वापस लेने का दबाव बनाने के लिए किया था छात्र का अपहरण
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फैजाबाद। अयोध्या कोतवाली के गांव भीखापुर स्थित एक निजी स्कूल के पास वैन से उतारकर मासूम छात्र के अपहरण का शुक्रवार को पर्दाफाश हो गया। अपहरण के पीछे मासूम के बाबा की हत्या में आरोपी भाई को छुड़ाने की कोशिश थी। दोनों परिवारों में लंबे समय से दुश्मनी चल रही है। मासूम को पांचवें दिन हरियाणा से अपहरणकर्ता के चंगुल से पुलिस ने मुक्त कराकर माता-पिता को सौंप दिया। मामले में हरियाणा पुलिस के सहयोग से दो अपहरणकर्ताओं समेत यहां उनके मददगार दो अन्य को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। स्कूल प्रबंधक, प्रधानाचार्य समेत अन्य कई नामजद लोगों की घटना में कोई भूमिका नहीं मिली है, पुलिस जल्द चार्जशीट में उनके नाम बाहर कर अपहरणकर्ताओं के सजा दिलाएगी।
पुलिस उपमहानिरीक्षक ओंकार सिंह ने मासूम के अपहरण से शुक्रवार के पर्दा उठाया। कहा कि एसएसपी सुभाष सिंह बघेल समेत एसपी सिटी अनिल सिंह सिसोदिया और पुलिस टीमों ने अच्छा काम किया है। पूरे मामले में डीआईजी स्वयं पल-पल के घटनाक्रम का पर्यवेक्षण कर रहे थे। बताया कि दीपांशु का रंजिश में अयोध्या कोतवाली के गांव भीखापुर स्थित एक निजी स्कूल के पास से स्कूल बस से उतारकर उसका अपहरण किया गया था। मामले में गांव की रंजिश का मुख्य मानते हुए पुलिस की छह टीम घटना की जांच कर रही थी। घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज में मुख्य आरोपी अनिल कुमार वर्मा की पहचान हुई थी, वह घर से लापता भी था। उसका फोन जब सर्विलांस पर लगाया गया तो उसकी लोकेशन हरियाणा में मिली। जांच में पता चला कि वह पूर्व में चार-पांच वर्ष हरियाणा के बहादुरगढ़ जिले के गांव रोहत में स्थित लोटस प्लाईवुड फैक्टरी में काम कर चुका है। इस आधार पर जब वहां पुलिस की टीम ने छापा मारा तो, दीपांशु सकुशल मिल गया। मौके से अनिल वर्मा निवासी जगदीशपुर दुबिहवा थाना हरैया बस्ती व विनोद निवासी गांव परसकटुई थाना सम्मनपुर अंबेडकरनगर को गिरफ्तार किया गया। बताया कि आरोपी अनिल व विनोद ने पूछताछ में बताया कि वह दीपांशु का अपहरण करने के लिए कई दिनों से रैकी कर रहे थे। उन्होंने स्कूल बस को रोकवाकर बच्चे के फूफा व उनके अन्य परिवारवालों का नाम लेकर बच्चे की मां की तबियत खराब होने की बात कही। जिस पर बस चालक ने बच्चे को उन्हें सौंप दिया। वे बच्चे को लेकर दुबौलिया बस्ती गए, वहां से बस से लखनऊ, वहां से दिल्ली होते हुए मंगलवार दोपहर बाद बहादुरगढ़ हरियाणा के रोहत गांव में एक प्लाइवुड फैक्टरी ले गए। वो वहां पर काम कर चुका था, इसके चलते वहां उसके कई परिचित के लोग थे। एसएसपी ने बताया कि मामले में 11 लोगों पर केस दर्ज किया गया था, अब तक अनिल व विनोद के अलावा त्रिभुवन निवासी जगदीशपुर दुबिहवा थाना हरैया बस्ती व अवधेश यादव निवासी नयापुरवा थाना रामजन्मभूमि को भी गिरफ्तार किया गया है। मामले में स्कूल के स्टाफ पर दर्ज हुए केस में अभी उनकी भूमिका की जांच की जा रही है।
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डेढ़ बीघा जमीन को लेकर चल रही खूनी दुश्मनी
एसएसपी सुभाष सिंह बघेल ने बताया कि दीपांशु के परिवारवालों की गांव में ही बसंत चौधरी के परिवार से डेढ़ बीघा जमीन को लेकर काफी दिनों से रंजिश चल रही है। इसमें दीपांशु के बाबा सीताराम वर्मा की हत्या 7 मई 2012 को कर दी गई थी। मामले में बसंत को आजीवन कारावास की सजा हुई थी। वह जेल में है। यही नहीं उसके मासूम के चाचा रमेश वर्मा भी वर्ष 2003 से गायब है। इसमें भी बसंत व उसके परिवार की भूमिका सामने आई थी। मामले में बसंत के परिवार के लोग दीपांशु के पिता दिनेश के ऊपर केस वापस लेने का दबाव बना रहे थे। वहीं, इसी रंजिश के डर से दिनेश ने दीपांशु को पढ़ने के लिए उसके फूफा ज्ञानसागर वर्मा निवासी भीखीपुरवा अयोध्या पढ़ने के लिए भेजा था।
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डीआईजी व स्कूल प्रबंधन ने दिया 50-50 हजार का इनाम
दीपांशु का पता लगाने के लिए एसएसपी ने एसपी सिटी अनिल सिंह सिसौदिया, सीओ अयोध्या राजू साव, सीओ सदर वीरेंद्र विक्रम, सीओ रुदौली अरविंद चौरसिया, अयोध्या कोतवाल विनोद बाबू मिश्र, एसएसपी पीआरओ नीरज राय के नेतृत्व में छह टीमों का गठन किया था। इसमें रीकेश सिंह प्रभारी थाना खंडासा, रामचंद्र सरोज प्रभारी हैदरगंज, एसआई अमित मिश्रा, रीतेश राय, रावेंद्र यादव, निर्मल सिंह व मुनिमन रंजन दूबे समेत अन्य शामिल थे। उनकी इस सफलता पर डीआईजी ने 50 हजार का इनाम देने की घोषणा की है। वहीं दीपांशु के स्कूल एमआरडी इंटरनेशन ने भी पुलिस टीम को 51 हजार रुपये इनाम देने की घोषणा की है। स्कूल की प्रधानाचार्य सुनीता सिंह ने उसने दीपांशु की फीस, कॉपी-किताब आदि का खर्च स्वयं वहन करने की घोषणा की है।
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