फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मैदान जीआईसी का, लाखों में बेच दी जमीन

विज्ञापन
विज्ञापन
मैदान जीआईसी का, लाखों में बेच दी जमीन
विज्ञापन

अयोध्या। अयोध्या महोत्सव के नाम पर कमाई का नया खेल सामने आया है। इसमें कई कद्दावर नेता समेत अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में हैं। डीएम डॉ. अनिल कुमार के आदेश पर सीडीओ, डीआईओएस, जिला वाणिज्यकर अधिकारी की टीम की जांच में खुलासा हुआ है कि पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए महोत्सव की अनुमति लेकर कॉलेज के खेल मैदान का व्यवसायिक प्रयोग किया गया। दुकानदारों को वर्ग फुट के रेट पर 11 दिन के लिए जमीनें बेची गईं।

जबकि जीआईसी प्रशासन को सिर्फ 25 हजार रुपये हाथ लगे। इस रिपोर्ट के बाद सिटी मजिस्ट्रेट ने अनुमति को स्वत: रद्द मान लिया मगर कार्रवाई के नाम पर प्रशासन बैकफुट पर है। इसे लेकर कॉलेज प्रशासन ने हाईकोर्ट के एक आदेश का हवाला देकर नाराजगी जताई है। राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान में अयोध्या महोत्सव की शुरूआत 28 दिसंबर को हुई थी।
विज्ञापन


अयोध्या महोत्सव न्यास समिति ने 11 दिन के लिए 22 शर्तों के आधार पर अनुमति ली। इसमें तय था कि कॉलेज की भूमि का कोई व्यवसायिक प्रयोग नहीं होगा। स्कूल चलने के वक्त कोई लाउडस्पीकर नहीं बजेगा, न ही कार्यक्रम होगा। मगर महोत्सव में शामिल करीब 200 दुकानों समेत झूले आदि के लिए कॉलेज की करीब 40 हजार वर्गफीट जमीनें 60 रुपये प्रतिवर्ग फीट के हिसाब से अलॉट की जाने लगी।

यह जानकारी होते ही कॉलेज प्रशासन ने आपत्ति की। कॉलेज के उपप्रधानाचार्य एसएन तिवारी ने बताया कि हाईकोर्ट से भी खेल के मैदान में किसी भी तरह की व्यवसायिक गतिविधि से रोक है, लेकिन आयोजकों ने जमकर खेल मैदान की जमीनों को आने वाले दुकानों, झूले, प्रदर्शनी आदि के संचालकों को महंगे दाम पर बेची।

यही नहीं उद्घाटन के दिन शोर शराबा करके शर्तों का उल्लंघन किया। कॉलेज के सिर्फ 25 हजार रुपये देकर रसीद ली गई। मामले की शिकायत हुई थी तो डीएम डॉ. अनिल कुमार ने सीडीओ के नेतृत्व में जांच टीम बनाई। इसमें डीआईओएस व वाणिज्य कर अधिकारी शामिल थे। टीम ने अपनी जांच में कॉलेज की भूमि का व्यवसायिक प्रयोग होने का मामला पकड़ा।

इसके बाद सिटी मजिस्ट्रेट ने शर्तों का अनुपालन न करने के कारण अनुमति को स्वत: रद्द करने का आदेश जारी किया। इसके बाद भी कार्यक्रम बदस्तूर जारी है। अयोध्या महोत्सव में कॉलेज की भूमि के अलॉट करने का खेल न होता तो शहरवासियों को सामान के साथ झूला के मजे भी सस्ते में मिलते। टिकट का दाम काफी कम होता।

दुकानदार नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं कि 10 बाई 12 फीट की एक दुकान के आठ हजार रुपयेे देने पड़े है। यह मुफ्त में मिलती तो दाम भी सस्ता होता और हमारी आय भी बढ़ती। अयोध्या महोत्सव का 6 जनवरी को समापन है। सिटी मजिस्ट्रेट की ओर से आयोजन की अनुमति रद्द होने के बाद भी मौके पर मंत्री, अफसरों समेत सत्ताधारी नेताओं की टीम रोजाना जुट रही है।

महोत्सव के नाम पर दुकानदारों से वसूली गई रकम की न रसीद काटी गई है न ही संबंधित विभागों को किसी तरह का टैक्स मिल रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद अयोध्या महोत्सव न्यास समिति को दी गई अयोध्या महोत्सव की अनुमति स्वत: रद्द हो गई है। यह आदेश जारी करने के साथ जिलाधिकारी, एसएसपी समेत सभी अधिकारियों को सूचित कर दिया गया है।
विज्ञापन


नगर मजिस्ट्रेट अयोध्या वैभव कुमार शर्मा ने बताया कि कॉलेज की ओर से महोत्सव जारी रहने की कोई शिकायत अभी नहीं मिली है। कॉलेज परिसर जीआईसी का है, जीआईसी प्रशासन की ओर से शिकायत मिलते ही बलपूर्वक महोत्सव रोक दिया जाएगा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें