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अयोध्या में हर साल बढ़ रहे देशी-विदेशी टूरिस्ट

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अयोध्या में हर साल बढ़ रहे देशी-विदेशी पर्यटक
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अयोध्या। रामनगरी के पर्यटन उद्योग को भी पंख लग गए हैं। देशी-विदेशी पर्यटकों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। दीपावली पर रिकॉर्ड दीपोत्सव समेत अराध्य राम की सबसे ऊंची प्रतिमा बनाने के एलान से अयोध्या की गूंज वैश्विक पटल पर पहुंची है। हालांकि धरातल पर सिर्फ रामायण सर्किट और घाटों के सौंदर्यीकरण का काम ही दिख रहा है।

बस अड्डा, रेलवे स्टेशन, इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज और पेयजल की परियोजनाएं अभी अधूरी हैं। पर्यटकों के लिए न कोई फुड प्लाजा है, न ढंग का होटल। मठ-मंदिरों और फुटपाथ के सहारे गंवई दर्शनार्थी तो गुजर-बसर कर लेते हैं, मगर विदेशी समेत महानगरों के संपन्न पर्यटक आज भी निहारते हुए गोरखपुर-लखनऊ में ही ठहरते हैं।
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सियासत के केंद्र में राम और अयोध्या रहने के बावजूद यहां पर्यटन उद्योग काफी पीछे था। विवादित ढांचा विध्वंस की घटना से प्रमुख धार्मिक आयोजनों पर खाकी का कर्फ्यू और बुनियादी सुविधाओं को लेकर सरकार की बेरुखी ने हमेशा अयोध्या को छला। मोदी-योगी की सरकार आई तो रामायण सर्किट और घाटों के सौंदर्यीकरण से जहां आकर्षण बढ़ा।

वहीं राम से जुड़ी दीपावली के भव्य सरकारी आयोजन ने पूरे विश्व में रामनगरी को केंद्र में ला दिया। अयोध्या की बदली फिजा का असर है कि हाल के दिनों में तमाम भड़काऊ बयानों और जमावड़े के बावजूद माहौल शांत रहा। योगी सरकार में रामलला के दर्शनार्थियों की संख्या में 50 फीसदी तक उछाल आया है।

इसके बावजूद यहां आने वाले श्रद्धालुओं को फुटपाथ पर ही रात बितानी पड़ती है। अयोध्या भ्रमण के लिए गाइड भी उपलब्ध नहीं हैं। रामकोट मोहल्लावासी 26 सालों से कैद भरी जिंदगी बिता रहे हैं। जातीय मंदिर भी जीर्णशीर्ण हो रहे हैं। उनके जीर्णोद्धार की नीति नहीं बन सकी है। अयोध्या में मुख्य रूप से तीन मेले होते हैं, जिसके लाखों श्रद्धालु गवाह बनते हैं।

यह मेले सरकारी स्तर पर किए जाते हैं। लेकिन अभी भी श्रद्धालुओं को वह सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं, जिनके वह हकदार हैं। क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी वीपी सिंह ने बताया कि अयोध्या में हर साल पर्यटक बढ़ रहे हैं। वर्ष 2018 के आंकड़ों को अंतिम रूप देने का काम चल रहा है। यह तीन सालों की तुलना में 50 फीसदी अधिक है।

दीपोत्सव में कोरिया गणराज्य की प्रथम महिला के आने से विदेशी पर्यटकों का संख्या काफी बढ़ी है। कुल देशी-विदेशी मिलाकर दो करोड़ से अधिक लोग आए। उन्होंने बताया कि 2016 में एक जनवरी से 31 दिसंबर तक एक करोड़ 54 लाख 82 हजार 456 देशी और 20 हजार 979 विदेशी यानि कुल एक करोड़ 55 लाख 3 हजार 435 पर्यटक अयोध्या आए थे।

जबकि 2017 में एक करोड़ 75 लाख 49 हजार 633 भारतीय व 23 हजार 962 विदेशी पर्यटक यानि कुल एक करोड़ 75 लाख 76 हजार 559 पर्यटक आए थे। 2018 में 31 अक्तूबर तक एक करोड़ 45 लाख टूरिस्ट आ चुके थे। नवबंर-दिसबंर में परिक्रमा व कार्तिक स्नान मेला समेत शिवसेना व विहिप के कार्यक्रमों में आई भीड़ दो करोड़ के आंकड़े को पार कर जाएगी।

अयोध्या में भी मेला प्राधिकरण होना चाहिए। जब मेला आता है तो एक अफसर को जिम्मा दे दिया जाता है। इससे मेले के लिए खरीदे जाने वाले सामानों में पारदर्शिता भी नहीं रहती है। जबकि खर्च भी अत्यधिक होता है। पर्यटन अधिकारी ब्रजपाल सिंह ने बताया कि सरकारी दो गेस्ट हाउस हैं, एक सिंचाई विभाग का है और दूसरा साकेत होटल।

सिंचाई विभाग में तीन डबल बेड रूम हैं, जबकि साकेत में 22 डबल बेड रूम हैं। चार हाल हैं जो कि छह-छह बेड के हैं। ज्यादातर श्रद्धालु धर्मशाला और मंदिरों में रुकना पसंद करते हैं। यह सस्ते हैं और उनमें उनकी आस्था भी है। अयोध्या में भगवान श्रीराम की भव्य मूर्ति प्रस्तावित है। इसके बनने से अयोध्या का सौंदर्य निखरेगा। यह मूर्ति विश्व की सबसे ऊंची मूर्तियों की श्रृंखला में एक होगी।

लगभग चार हजार करोड़ से चौरासी कोसी परिक्रमा पथ का सुंदरीकरण, 29 करोड़ से राम की पैड़ी की अविरलता, सरयू पर बैराज, 100 करोड़ से अयोध्या बाईपास पर यात्री सुविधा केंद्र और अन्य सहूलियतें होने जा रही हैं। मेडिकल कॉलेज, 154 करोड़ से रामायण संग्रहालय, 107 करोड़ से मंदिर मॉडल का अयोध्या रेलवे स्टेशन, अयोध्या से रामेश्वरम तक ट्रेन का संचालन, 176 करोड़ से रामवनगमन मार्ग जैसी योजनाओं के मूर्त रूप लेने से रामनगरी धार्मिक एवं पर्यटन की दृष्टि से विकसित होगी, तो पर्यटन भी अयोध्या का रुख करेंगे।

मध्यप्रदेश से अयोध्या दर्शन-पूजन करने पहुंचे श्रद्धालु जीवन लाल ने कहा कि अयोध्या को लेकर लोगों द्वारा भ्रम फैलाया जाता है। यहां तो कोई तनाव नहीं है। विकास में अयोध्या पीछे नजर आती है। इस ओर ध्यान केंद्रित करने से अयोध्या की धार्मिक आभा और निखर उठेगी। दिल्ली से अयोध्या घूमने पहुंचे एमबीए के छात्र रमन कहते हैं कि अयोध्या को राजनीतिज्ञों ने छला है।

अयोध्या आकर असीम शांति की अनुभूति होती है। यहां मूलभूत सुविधाओं पर सरकार को ज्यादा ध्यान देने की जरूरत हैद्घ गरिमा के अनुकूल विकास नहीं है। उत्तराखंड के नरेंद्र सिंह ने कहा कि अयोध्या में श्रद्धालुओं के रुकने की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। अयोध्या की भूमि तो हर किसी को आकर्षित करती है, लेकिन अयोध्या आने पर सुविधाओं का अभाव अखरता है।

राममंदिर का निर्माण तो जल्द से जल्द हो जाना चाहिए। गुजरात की उषाबेन बोंली की रामलला के दर्शन किए। कहा रामलला को मंदिर में देखने की इच्छा है। इतना जरूर है अन्य धार्मिक नगरों की अपेक्षा रामनगरी विकास के साथ कदमताल करने में बहुत पीछे नजर आ रही है, यदि इस ओर ध्यान दिया जाए तो अयोध्या की गरिमा बढ़ेगी।

अयोध्या सांझी सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासत की प्रमुख केंद्र है। अयोध्या की भूमि सभी को आकर्षित करती है। इतिहासकार डॉ. हरिप्रसाद दुबे बताते हैं कि जैन, बौद्घ, सिख सभी धर्मावलंबी अयोध्या से प्रभावित हुए। जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर की भूमि भी अयोध्या है। महात्मा बुद्ध ने अपने कई चार्तुमास यहीं बिताए।
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सिख गुरू तेग बहादुर, गुरू गोविंद सिंह की स्मृति से भी अयोध्या अनुप्राणित है। कहा कि सनातन संस्कृति के लिए अयोध्या की भूमि बहुत उर्वर रही है लेकिन जो सांस्कृतिक चिन्ह हैं उस पर वक्त की धूल चढ़ गई हैं उसे पोंछने की जरूरत है। तभी श्रद्धालुओं व पर्यटकों की आमद बढ़ेगी।
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