सावन मास का बुधवार से शुभारंभ होने के साथ ही रामनगरी शिव भक्ति के रंग में रंगने लगी है। वहीं दूसरी तरफ रसिक परंपरा के रंगमहल व सद्गुरू सदन गोलाघाट में झूलनोत्सव का शुभारंभ हो गया है।
दोनों मंदिरों में आयोजित कार्यक्रमों में श्रद्धालुओं की भीड़ जुट रहे हैं। रामनगरी की परंपरा में झूलनोत्सव का शुभारंभ मुख्य रूप से श्रावण शुक्ल तृतीया तिथि से होता है। इसी तिथि से सभी मंदिरों में झूले पड़ने के साथ नगरी पूर्णिमा तक उत्सव के रंग में डूब जाती है।
प्राचीन परंपरा की रंगमहल पीठ के महंत रामशरण दास कहते हैं अयोध्या में नित नूतन उत्सव होते रहते हैं, लेकिन झूलन उत्सव की छटा ही निराली है। आराध्य प्रिया प्रीतम सरकार जहां झूलन में बैठकर आनंद का अनुभव करते हैं, वहीं अपने भक्तों को भी आनंदित करते हैं।
उन्होंने कहा कि झूलनोत्सव के माध्यम से भक्तगण अपने आराध्य के सुख और आनंद को देखकर आनंदित होते हैं। शाम से शुरू होने वाला सांस्कृतिक कार्यक्रम मध्यरात्रि तक चलता है, जिसमें भगवान को गीत, संगीत व नृत्य के माध्यम से प्रसन्न करने की कोशिश होती है।
रसिक उपासना परंपरा की दूसरी पीठ सदगुरु सदन गोलाघाट में भी महंत सिया किशोरी शरण के निर्देशन में झूलनोत्सव आयोजित हो रहा है। उत्सव में भगवान के विग्रह के साथ भगवान के स्वरूप को भी झूले पर बैठा कर झुलाया जा रहा है। साथ में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित हो रहे हैं।