राजेंद्र कुमार पांडेय
अयोध्या। मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ पहली बार योगीराज भरत की तपोस्थली 15 जून को आएंगे। अब इसमें क्या खास है इसके निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। नंदीग्राम (भरतकुंड) में योगी बार पहली योगीराज के सामने होंगे तो कुछ तो नया होगा। मुख्यमंत्री के भरतकुंड आने के पीछे नंदीग्राम के विकास के साथ ही साथ लोकसभा चुनाव पर भी नजर है। वह नंदीग्राम से एक तीर से कई सियासी निशाने भी साध सकते हैं।
अयोध्या की 84 कोस को सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से अयोध्या के चर्चित तीन स्थलों को अंदरखाने में सबसे महत्वपूर्ण चिंह्ति किया गया है। इनमें श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या, योगीराज भरत की तपस्थली नंदीग्राम और चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ की चिताग्नि भूमि विल्वहरि घाट हैं। यह सीधे तौर पर मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम से जुड़ते हैं। राम लला के मंदिर का निर्माण हो और अन्य दोनों स्थल इससे कमतर रहे, इसे मर्यादा के अनुरुप नहीं माना जा रहा है। इसलिए इनके विकास पर अयोध्या से लेकर प्रदेश और केंद्र की नजर है।
प्रदेश में भाजपा की सरकार बने छह साल हो गए। इस बीच सीएम दर्जनों बार अयोध्या का दौरा कर चुके हैं लेकिन 15 किमी. दूर अयोध्या के दूसरे सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाले नंदी ग्राम(भरतकुंड) नहीं गए। मुख्यमंत्री का यह दौरा अचानक नही हैं, बल्कि यह सोची समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा।
दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भाजपा लोक सभा चुनाव की तैयारी में कार्यक्रम चला रही है। सूत्रों की माने तो सांसद लल्लू सिंह के नेतृत्व में भरतकुंड(नंदीग्राम) के समग्र विकास को लेकर नए सिरे से बड़ी परियोजना तैयार कराई गई है। लगभग डेढ़ साल पहले भी ऐसी परियोजना पर काम हुआ था। सांसद के साथ अफसरों ने दौरा किया था। किन्ही कारणों से उसे रोक दिया गया था। अब नए सिरे से इसमें कई बड़े कार्यो के प्रस्ताव शामिल किए जाने की चर्चा भी है। विभागों में भी लोकार्पण और शिलान्यास को लेकर कार्यवाही शुरू कर दी गई है। मुख्यमंत्री के दौरे में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की मर्यादा के अनुरुप उनके भ्राता भरत की तपोस्थली के विकास के लिए बड़ी घोषणा हो सकती है। (संवाद)