फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भ्रष्टाचार में निर्माण निगम के जीएम व परियोजना प्रबंधक सस्पेंड

विज्ञापन
विज्ञापन
अयोध्या। मुख्यमंत्री योगी ने अयोध्या मेडिकल कॉलेज के निर्माण में भ्रष्टाचार व अनियमितता बरतने के आरोप में राजकीय निर्माण निगम (यूपीआरएनएन) के अयोध्या अंचल के महाप्रबंधक यतेंद्र कुमार को निलंबित कर दिया। उनके खिलाफ एसआईटी जांच भी शुरू हो गई है। जबकि शिकायत आने के बाद परियोजना प्रबंधक अनिल कुमार को भी 26 मई को सस्पेंड कर दिया गया।
विज्ञापन

मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के निर्माण से जुड़े अनियमितता के मामले में निर्माण इकाई यूपीआरएनएन पर हुई कार्रवाई से शनिवार को हड़कंप मचा रहा। विभागीय सूत्र बताते हैं कि मामले में महाप्रबंधक के खिलाफ तमाम ऑडियो-वीडियो सबूतों के साथ सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय से शिकायत हुई थी। इसके बाद शासन ने सख्त रुख अपनाया है।
दर्शननगर में 300 बेड का हॉस्पिटल व ट्रॉमा सेंटर बनाने में उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम (यूपीआरएनएन) का भ्रष्टाचार सामने आया है। इस हॉस्पिटल में मॉर्चुरी हाउस का पैसा हजम कर लिया गया। साथ ही राजर्षि दशरथ राजकीय मेडिकल कॉलेज, अयोध्या को सौंपे गए इस संयुक्त अस्पताल व ट्रॉमा सेंटर में फायर एनओसी नहीं ली गई। यहां आग से बचाव के लिए न फायर टैंक बन पाया है, न ही हाईड्रेंट। ऐसे ही कई मामलों में शिकायत के बाद अब कार्रवाई का चाबुक चला है।
विज्ञापन

यूपीआरएनएन को डीसू पैटर्न पर बनानी थी मॉर्चुरी
मॉर्चुरी हाउस खुद यूपीआरएनएन के अभियंताओं को डीसू पैटर्न पर बनानी थी। इसका ठेकेदार से लेना-देना नहीं था। लेकिन अभियंताओं ने ऐसी लूट-खसोट मचाई कि पूरे परिसर में इसका कहीं अस्तित्व ही नहीं है। डीएम की जांच में मॉर्चुरी भवन न मिलने पर कड़ी चेतावनी दी गई तो आननफानन में अस्पताल के पीछे मॉर्चुरी बनना शुरू हुई। मगर वहां अभी तक स्ट्रक्चर बांस-बल्ली के सहारे है। नींव से लेकर पूरी दीवार व छत में बीम तक नहीं डाली गई है। मेडिकल स्टाफ कहता हैं कि यह कब जमींदोज हो जाए, कहा नहीं जा सकता।
डॉक्टर, मरीज व तीमारदारों की जिंदगी खतरे में
इससे भी बड़ा घपला आग से बचाव के उपायों की उपेक्षा करना है। निर्माण कार्य में भवन सौंपने से पहले आग से बचाव के लिए मानकों के अनुसार भूमिगत फायर टैंक, पाइप लाइन, हाइड्रेंट आदि बनाकर एनओसी लेना अनिवार्य था, मगर नीचे से लेकर ऊपर तक मिलीभगत करके पहले स्वास्थ्य विभाग को और अब मेडिकल कालेज प्रशासन को भवन सौंप दिए गए। यहां वर्तमान में कोविड वन हास्पिटल चल रहा है। आम दिनों में सैकड़ों लोग इलाज कराते हैं, मरीज-तीमारदार के साथ डॉक्टर-स्टाफ न सिर्फ काम करते हैं, बल्कि आवास भी है। आग लगने में सबकी जिंदगी खतरे में रहेगी।
34 करोड़ से बढ़कर 60 करोड़ हुई लागत, फिर भी खेल
दर्शननगर में तीन सौ शैय्या अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर का निर्माण शुरू से ही लूट-खसोट का अड्डा रहा है। वर्ष 2008 में 33.15 करोड़ रुपये की लागत से इसकी नींव रखी गई थी, लेकिन साल-दर-साल लेटलतीफी का शिकार होते हुए अब तक इस पर कुल 59.44 करोड़ रुपये का भुगतान हो चुका है। इसके बाद भी तमाम कार्य नदारद हैं। सपा सरकार में हाईकोर्ट की फटकार के बाद आननफानन में मॉर्चुरी व फायर सुविधा के बगैर ही 100 बेड के अस्पताल का लोकार्पण तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कर दिया था। अब योगी सरकार में जैसे-जैसे भ्रष्टाचार की परतें खुल रही हैं, कार्रवाई तेज हो गई है।
23 मई को हटाया, फिर तीन दिन में वापस कर दी थी तैनाती
-यूपीआरएनएन में भ्रष्टाचार की शिकायत पर मुख्यमंत्री कार्यालय से एसआईटी जांच के आदेश का असर 23 मई को दिखा। आननफानन में पत्र संख्या 214/प्रबं (का-1)/टीसी/रीनिनि/20 के जरिए महाप्रबंधक, कार्मिक एसके श्रीवास्तव ने अयोध्या अंचल में मेडिकल कॉलेज व हास्पिटल के कार्य देख रहे महाप्रबंधक यतेंद्र कुमार समेत परियोजना प्रबंधक अनिल कुमार का तबादला कर दिया। लेकिन अचानक 26 मई को फिर जारी आदेश संख्या 217/प्रबं (का-1)/टीसी/रानिनि/20 के जरिए फिर यतेंद्र को महाप्रबंधक परिवाद मुख्यालय लखनऊ से अयोध्या अंचल का दोबारा महाप्रबंधक बना दिया गया। जबकि अनिल कुमार की जगह भेजे गए अनिल कुमार मिश्र का तबादला यथावत रहा। जबकि पूर्व परियोजना प्रबंधक अनिल कुमार को सस्पेंड कर दिया गया है। सूत्रों का कहना है कि यतेंद्र कुमार के खिलाफ वसूली को लेकर आडियो-वीडियो सबूतों के साथ एसआईटी जांच कर रही है। अब शनिवार को सीएम योगी ने महाप्रबंधक यतेंद्र कुमार को भी सस्पेंड कर दिया।
यूपीआरएनएन को दी है चेतावनी: डीएम
जिलाधिकारी अनुज कुमार झा ने बताया कि दर्शननगर स्थित 300 बेड का संयुक्त अस्पताल अब मेडिकल कॉलेज का हिस्सा है, इसका निर्माण यूपीआरएनएन ने कराया है। यहां मॉर्चुरी हाउस और फायर टैंक आदि न होना गंभीर मामला है। हमने स्थलीय जांच में इसे लेकर कई पत्र व अनुस्मारक यूपीआरएनएन के महाप्रबंधक को लिखा है। फायर एनओसी लेने के लिए चेतावनी भी दी है।
अधूरा कार्य नहीं किया हैंडओवर: प्राचार्य
राजर्षि दशरथ राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. विजय कुमार ने कहा कि यूपीआरएनएन का काम अधूरा होने से हमने कुछ भी हैंडओवर नहीं किया है। मॉर्चुरी व आग से बचाव के उपाय न होने की शिकायत डीएम से की थी। अभी दो सौ बेड विस्तार का काम चल रहा है। डीएम की चेतावनी के बाद फायर व मॉर्चुरी का कार्य शुरू हो गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें