अयोध्या। चेकिंग के दौरान कहीं भी-कभी भी अगर बस या अन्य यात्री वाहन सीज होते हैं तो यात्री घबराएं नहीं। उन्हें उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए संभागीय परिवहन विभाग पूरी जिम्मेदारी लेता है। मान लीजिए कि आप निजी बस में दिल्ली से बिहार जाने के लिए निकले हैं और लखनऊ के आस-पास चेकिंग के दौरान बस सीज हो जाती है तो आपको सरकारी बस से बिहार पहुंचा दिया जाएगा। कभी-कभार ऐसा होता है कि कई राज्यों में सरकारी बसें नहीं जा पाती। ऐसी स्थिति में उस राज्य के बॉर्डर पर यात्रियों को पहुंचवाया जाता है।
नहीं देने पड़ते अतिरिक्त पैसे
संभागीय परिवहन विभाग के अधिकारियों की मानें तो वाहन सीज होने के बाद जिन सरकारी बसों से यात्रियों को उनके गंतव्य तक भेजा जाता है उसमें यात्रियों को टिकट का पैसा नहीं देना पड़ता। या तो सीज हुई बस के कंडक्टर से जहां तक यात्रा पूरी हुई रहती है उसके आगे का किराया वापस करा दिया जाता है, या फिर सीज हुई निजी बस के मालिक से विभाग यात्रियों का किराया वसूल करता है।
कोई नहीं निकाल सकता चाबी
अधिकारियों की मानें तो वाहनों पर कार्रवाई के बाद उन्हें नजदीकी थानों या फिर संभागीय परिवहन विभाग के कैम्पस में खड़ा कराया जाता है, लेकिन तत्काल हुई कार्रवाई के बाद किसी भी वाहन की चाबियां ड्राइवर से नहीं ली जा सकती।
इन मामलों में सीज होते हैं वाहन
1-रजिस्ट्रेशन न होने पर
2-परमिट न होने पर
3-वाहन का टैक्स न जमा होने पर
4-फिटनेस न होने पर
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डग्गामार वाहनों से मत करें यात्रा
रोडवेज एआरएम आदित्य प्रकाश ने यात्रियो को चेताया है कि डग्गामार वाहनों में कभी भी यात्रा न करें। क्योंकि ये सवारियों को भूसे की तरह भरते हैं। सवारी से ज्यादा सामान होता है। अमूमन देखा जाता है कि निजी वाहनों के सीज होने के बाद उसमें सवार कुछ दलाल लोग यात्रियों को भड़काते हैं कि कोई भी बस से नहीं उतरेगा। आप लोग हंगामा शुरू कर दोगे तो अधिकारी वाहन के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेंगे ।यात्रियों को ऐसे लोगों से बचना चाहिए।