अयोध्या। उदासीन ऋषि आश्रम में सदियों पुरानी परंपरा शनिवार को जीवंत होती दिखी। उदासीन परंपरा के करीब 100 संतों की टोली चातुर्मास करने के अयोध्या पहुंची तो भव्य अभिनंदन किया गया। रामनगरी स्थित उदासीन परंपरा की प्रधान पीठ उदासीन आश्रम रानोपाली के महंत डॉ. भरत दास के नेतृत्व में मोहबरा चौराहे पर संतों का अभिनंदन पुष्पवर्षा से किया गया। यहां से बाजे-गाजे के साथ संतों का समूह उदासीन आश्रम पहुंचा। यहां रामनगरी के संत समाज की ओर से भव्य अभिनंदन किया गया।
उदासीन आश्रम के महंत डॉ. भरत दास ने बताया कि आश्रम के तपस्वी संत संगतबख्श ने इस परंपरा का सूत्रपात किया था। उदासीन परंपरा के संत धर्मरक्षा के लिए भ्रमणशील रहते हैं। संतों का समूह जब पूर्वांचल में प्रवेश करता है तो उस साल चातुर्मास उदासीन आश्रम में ही होता है। इससे पहले संतों की भ्रमणशील टोली ने 2007 में यहां चातुर्मास किया था। डॉ. भरत दास ने बताया कि इन चार महीनों में विभिन्न अनुष्ठानों का आयोजन तपस्वी संत बाबा कल्याण दास के पावन सानिध्य में होगा।
इस कड़ी में 18 जून से 15 जुलाई तक श्रीशिव महापुराण, 16 जुलाई से 16 अगस्त तक श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण का प्रवचन, 17 अगस्त से 16 सितंबर तक श्रीमद्भागवत महापुराण का आयोजन होगा। उदासीन आश्रम के संत माधवानंद ने बताया कि संतों के जत्थे की अगुवाई महंत दुर्गादास कर रहे हैं। उनके साथ महंत रघुमुनि, महंत अद्वैतानंद, महंत अमृत मुनि, महंत सेवादास सहित अन्य संत शामिल हैं। अभिनंदन समारोह में अयोध्या के महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठी, महंत अवधेश दास, महंत अवध किशोर शरण, महंत बलरामदास, महंत धर्मदास, रामभद्र दास सहित अन्य लोग मौजूद रहे।