अयोध्या। पांच अगस्त को पीएम मोदी के हाथों भूमि पूजन होने के बाद से ही राममंदिर निर्माण कार्य में तेजी आ गई है। इसके लिए एलएंडटी के करीब पचास कर्मचारी रामजन्मभूमि परिसर की साफ-सफाई में जुट गए हैं। जबकि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के मंदिर निर्माण समिति की बैठक 20 अगस्त को दिल्ली में होगी। बैठक में 70 एकड़ परिसर के लिए मास्टर प्लान पर चर्चा की जाएगी। इस बैठक के बाद ही अयोध्या विकास प्राधिकरण में नक्शा स्वीकृति के लिए आवेदन किया जाएगा। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ अनिल मिश्रा बैठक में शामिल होने के लिए दिल्ली रवाना हो गए हैं।
ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ अनिल मिश्रा 16 अगस्त को ही अयोध्या से लखनऊ के लिए रवाना हो गए थे। सोमवार को ट्रेन के जरिए दोनों दिल्ली के लिए रवाना हुए। वे मंदिर निर्माण समिति की बैठक में शामिल होगें। चूंकि यह मंदिर निर्माण समिति की बैठक है इसलिए इसमें ट्रस्ट के सभी सदस्य हिस्सा नहीं लेंगे। ट्रस्ट के कुछ सदस्यों के अलावा एल एंड टी कंपनी के अधिकारी और आर्किटेक्ट को ही बैठक में बुलाया गया है, बैठक की अध्यक्षता निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र करेंगे।
राममंदिर निर्माण के पहले चरण में दो सौ फिट गहरी नींव खोदी जानी है। नीवं खोदाई के लिए माप भी की जा रही है। बताया गया कि मंदिर निर्माण समिति की बैठक में पूरे 70 एकड़ के परिसर के मास्टर प्लान पर चर्चा की जानी है। नींव की खोदाई से लेकर मजूदरों की संख्या और मंदिर की भव्यता को लेकर भी चर्चा होगी। परिसर का मास्टर प्लान बनने के बाद ट्रस्ट मंदिर का नक्शा स्वीकृति के लिए विकास प्राधिकरण में आवेदन करेगा, नक्शा स्वीकृति होने के बाद मंदिर निर्माण की गति तेज हो जाएगी।
माना जा रहा है कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय दिल्ली में पीएम मोदी से भी मुलाकात कर सकते हैं। यही नहीं राष्ट्रपति, लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी समेत देश के अन्य दिग्गज नेताओं को राम जन्मभूमि के भूमिपूजन का प्रसाद भी भेंट करने की योजना है।
रामजन्मभूमि में विराजमान रामलला की आरती में आम भक्तों के शामिल होने पर अभी रोक लगाई गई है, यह सुरक्षा कारणों से तय किया गया है। ट्रस्ट ने साफ किया है कि अभी रामलला की आरती में आम भक्तों के शामिल होने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्र का कहना है कि अभी इस तरह की कोई व्यवस्था नहीं की गई है, सुरक्षा को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। जबकि रामलला के पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास का कहना है कि यदि कोई भक्त रामलला को विशेष भोग प्रसाद चढ़ाना चाहता है तो इसके लिए उसे ट्रस्ट से अनुमति लेनी पड़ेगी। यदि ट्रस्ट अनुमति देता है तो कोई भी श्रद्धालु अपनी भावना से यथाशक्ति जो भी दान देगा, उसके अनुरूप उसी के नाम से आरती करा दी जाएगी या भोग प्रसाद चढ़ा दिया जाएगा।