अयोध्या में मंगलवार को हनुमान जयंती व चैत्र पूर्णिमा में पतित पावनी सरयू में डूबकी लगाते श्रद्धालु।
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चैत्र रामनवमी मेले के बाद चैत्र मास की पूर्णिमा पर नगरी में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। श्रद्धालुओं ने पतित पावनी सरयू में डुबकी लगाई और प्रमुख मठ-मंदिरों में दर्शन-पूजन किया। दक्षिण शैली के कैलेंडरों के अनुसार नगरी में सरयू तट स्थित श्री कालेराम मंदिर में ही हनुमान जयंती का पर्व श्रद्धा के साथ मनाया गया।
चैत्र रामनवमी मेला संपन्न होने का बाद भी नगरी में हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ जमी रही। मंदिरों में भगवान श्री रामलला के जन्म के बाद आयोजित हो रहे बधाई व छठ्योत्सव के कार्यक्रमों में श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल हो भगवान के बाल रूप के दर्शन पूजन कर रहे थे।
चैत्र पूर्णिमा पर्व की पूर्व संध्या से ही श्रद्धालुओं की भीड़ नगरी में जुटने लगी थी। भोर होते ही श्रद्धालुओं का कारवां सरयू तट पर जुटने लगा। स्नान-दान के बाद प्रमुख मंदिरों नागेश्वरनाथ, हनुमानगढ़ी, कनक भवन, श्रीराम जन्मभूमि सहित अन्य मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ देर शाम तक लगी रही।
रामनगरी के प्रमुख व अधिकांश मंदिरों में हनुमंत लला की जयंती छोटी दीपावली पर्व पर मनाए जाने की परंपरा है। दक्षिण शैली के कैलेंडरों के अनुसार चैत्र पूर्णिमा पर हनुमंत लला की जयंती के मद्देनजर शुक्रवार को सरयू तट स्थित दक्षिण पूजन-पद्धति के श्रीकालेराम मंदिर में जयंती श्रद्धा के साथ मनाई गई।
मंदिर के महंत यशवंत राव दिगंबर देशपांडे ने बताया कि जयंती पर शुभारंभ सुबह विराजमान भगवान की मंगल आरती, अभिषेक किया गया। शास्त्रीय भजन संगीत व नारदीय संकीर्तन आदि धार्मिक कार्यक्रमों के बीच जन्मोत्सव मनाया गया।