अयोध्या। कोरोना से जंग के बीच डेंगू को नजर अंदाज करना शायद लोगों के लिए ठीक नहीं होगा। बरसात के दो माह बीत चुके हैं, अब डेंगू का सीजन भी आ चुका है। लेकिन अभी महकमा इसे लेकर गंभीर नहीं है। जबकि बीते वर्ष डेंगू का प्रकोप जिले में भी चरम पर था। यदि लोग अभी से सचेत नहीं हुए सितंबर माह से इसका पीक टाइम शुरू होने पर स्थिति चिंताजनक हो सकती है।
बरसात के मौसम में दो माह का समय व्यतीत हो चुका है। जगह-जगह रुके बारिश के पानी से अब मच्छरजनित रोग मलेरिया, डेंगू व चिकनगुनिया का प्रकोप बढने की संभावना प्रबल हो गई है। आमतौर पर अगस्त, सितंबर माह से डेंगू का प्रकोप बढने लगता है। इसके लिए मरीजों की जांच के साथ उनके इलाज के लिए अस्पतालों में अलग वार्ड भी बनाया जाता है।
इस बार कोरोना संक्रमण की वजह से ओपीडी सेवाएं काफी समय से बाधित हैं। इसलिए इस तरह के मरीज अस्पतालों में पहुंच नहीं पा रहे हैं। उधर, जिले में कोरोना का प्रकोप चरम पर होने की वजह से स्वास्थ्य महकमा पूरे मनोयोग से डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, मस्तिष्क ज्वर जैसी बीमारियों को लेकर फिक्रमंद नहीं दिख रहा है। अस्पतालों में वार्ड नहीं बन सके हैं। जून माह में आयोजित होने वाला मलेरिया माह भी इस बार नहीं मनाया जा सका है। हालांकि, विभागीय अधिकारी बचाव सामग्रियों की पर्याप्त उपलब्धता का दावा कर रहे हैं।
बीते वर्ष जिले में डेंगू ने खूब कहर बरसाया था। प्रतिदिन काफी संख्या में मरीजों के मिलने से महकमा हलकान दिखा था। इस बार ओपीडी सेवाएं बंद होने के कारण ऐसे मरीज आरडीसी तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। अगस्त माह में अब तक आरडीसी में सिर्फ एक मरीज ही पहुंच सका है, जो कि निगेटिव आया है।
मेडिकल कॉलेज दर्शनगर के मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि कोरोना संक्रमण और डेंगू दोनों में ही रोगी को बुखार आता है। डेंगू के बुखार में उल्टी, सूजन, रैशेज होते हैं। अगर डेंगू ने गंभीर रूप ले लिया हो तो इसमें बार-बार उल्टी आना, सांस तेज चलना, बदन व पेट में दर्द, मसूड़ों में खून निकलना, कमजोरी आदि शामिल है। वहीं, कोरोना संक्रमण होने पर रोगी को दस्त हो सकते हैं। शुरुआत में बुखार, सूखी या बलगम वाली खांसी, सांस लेने में दिक्कत, स्वाद का पता न चलना, सुगंध न आना, गले में खरास आदि शामिल हैं।
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. रामकिशोर ने बताया कि पूरी बांह की शर्ट और पैंट पहनें, खाली बर्तन व बाल्टियों को उल्टा करके रखें, सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें, अपने शरीर के खुले अंगों पर मच्छर से बचाने वाली क्रीम और लोशन लगाएं, डस्टबिन को नियमित साफ करें, घर के आस-पास पानी जमा न होने दें, बाहर के कटे फल न खायें, स्वच्छ पानी पियें, घर का ही खाना खायें।
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. एमए खान ने बताया कि डेंगू से बचाव की तैयारी शुरू की गई है। फागिंग मशीन, एंटी लार्वा छड़िकाव की दवा उपलब्ध है। सीएचसी-पीएचसी पर भी सामग्रियां उपलब्ध हैं।