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रडार तरंगों से मापी जा रही राम मंदिर भूमि की क्षमता

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अयोध्या-राम मंदिर का मॉडल - फोटो : FAIZABAD
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अयोध्या। राममंदिर शताब्दियों तक अक्षुण्ण रहे इसको लेकर देश की 10 बड़ी तकनीकी संस्थाएं पिछले आठ माह से मंथन करने में जुटी हुई हैं। अब तक तीन बार रामजन्मभूमि परिसर के उस स्थान की मिट्टी का परीक्षण किया जा चुका है जहां रामलला का भव्य मंदिर निर्माण होना है। अब तीसरी बार एनजीआरआई हैदराबाद के इंजीनियरों की टीम भूमि की क्षमता मापने में जुटी है। एनजीआरआई के इंजीनियर रडार तरंगों के माध्यम से भूमि की क्षमता की जांच करने में जुटे हुए हैं।
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राममंदिर का निर्माण 2.7 एकड़ में होना है। इसी एरिया में राममंदिर की नींव के लिए खोदाई की जानी है। राममंदिर की नींव अब पत्थरों से बनाई जानी है। चूंकि करीब 70 फिट गहराई तक परिसर की मिट्टी बलुई है और मिट्टी की पकड़ भी ढीली है इसलिए कंकरीट के बजाय पत्थरों से नींव तैयार करने का निर्णय लिया गया है। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का प्रयास है कि नींव ऐसी बने कि राममंदिर शताब्दियों तक अक्षुण्ण बना रहे। इसलिए भूकंप के दुष्प्रभाव, प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति से निपटने के लिए देश के 10 तकनीकी संस्थाओं के विशेषज्ञ दिन-रात एक किए हुए हैं। आठ माह बीत चुके हैं लेकिन अभी तक राममंदिर की मजबूत नींव का ड्राइंग तैयार नहीं हो सका है। अब एनजीआरआई की टीम 70 मीटर गहराई तक रडार तरंगों के माध्यम से भूमि की क्षमता की जांच करने में जुटी हुई है। इससे पूर्व भी फरवरी व जुलाई में दो बार मिट्टी की टेस्टिंग की जा चुकी है।
सीमेंट की शक्ति बढ़ाने लिए अध्ययन कर रही आईआईटी चेन्नई
ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के मुुताबिक गर्भगृह स्थल के पास जहां खोदाई होनी है वहां करीब 50 फीट की गहराई तक मलबा भरा है। ऐसे में सीमेंट से राममंदिर की नींव भरना कठिन होगा। सीमेंट की आयु ज्यादा से ज्यादा 150 वर्ष होती है ऐसे में सीमेंट में क्या मिलाया जाए कि उसकी आयु 300 से 400 वर्ष हो जाए इसके लिए आईआईटी चेन्नई के इंजीनियर अध्ययन करने में जुटे हैं। उनके अध्ययन के अच्छे परिणाम सामने आए हैं। पूरी उम्मीद है कि सीमेंट में क्या-क्या मिलाया जाए कि उसकी आयु बढ़ जाए इसको शीघ्र ही फाइनल कर लिया जाएगा। कोयले की राख, अभ्रक, विशेष रसायन आदि मिलाने पर विचार चल रहा है।
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किसी भी मंदिर के निर्माण में देश की 10 बड़ी संस्थाएं जुटी हुई हैं, तो उसकी मजबूती व लंबी आयु की गंभीरता का अंदाजा स्वयं लगाया जा सकता है। राममंदिर राष्ट्रीय महत्व की धरोहर है, हम चाहते हैं यह शताब्दियों तक अक्षुण्ण रहे। संभव है कि 15 जनवरी से राममंदिर के नींव की खोदाई का काम शुरू कर दिया जाएगा। जिस दिन से राममंदिर का निर्माण शुरू होगा तब से 36 से 39 महीने में काम पूरा कर लिया जाएगा। -चंपत राय, महासचिव, श्रीरामजन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट
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