श्रंगारहाट निवासी बाबू गुप्ता के छह वर्ष पुत्र पवन कुमार गुप्त ने अपनी मरजी से फोड़ा गुल्लक।
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घरों में गुल्लक रखने की परंपरा रही है जो बदलते दौर में भी कायम है। गुल्लक का बच्चों से बड़ा गहरा रिश्ता रहता है। ज्यादातर घरों में बच्चे गुल्लक रखते हैं और जरूरत पर उसे फोड़ भी लेते हैं। गुल्लक का पैसा बच्चे ही खर्च करते हैं।
लेकिन पैसों की तंगी के चलते ऐसा शायद पहली बार हो रहा है जब घर-घर में बच्चों की गुल्लक बड़े फोड़ रहे हैं और घर का रोजमर्रा का खर्च उससे चल रहा है। फैजाबाद-अयोध्या में परिवारों का जायजा लिया गया तो कई जगहों पर बच्चों की छोटी-छोटी बचत गाढ़े वक्त पर काम आती हुई दिखी।
गुल्लक फोड़ दिए गए, बच्चों को यह आश्वासन देते हुए कि इससे ज्यादा रकम वापस मिलेगी। स्कूलों में पहले संचयिनी नाम से बचत योजना चलती थी जो जहां बच्चों के रुपए जमा होते थे लेकिन यह योजना अब समाप्त सी हो गई है।