। कैडिला, रैनवैक्सी, सनफार्मा, एलंबिक सहित दवा की 30 ऐसी कंपनियां शासन से निर्धारित दर से ऊंची दरों पर बाजार में दवाएं बेच रही हैं। ये कंपनियां ‘ड्रग कंट्रोल प्राइज आर्डर’ (डीसीपीओ) को दरकिनार कर मनमाने ढंग से दवाओं की कीमतें तय कर बाजार में बेच रही हैं।
शासन के निर्देश पर गैर जिलों के ड्रग इंस्पेक्टरों की टीम ने जिले की 23 थोक व फुटकर की दुकानों से 82 दवाओं के नमूने सील किए हैं। सर्विलांस के तौर पर संकलित किए गए नमूनाें में नामीगिरामी दवा कंपनियों की मंहगे ब्रांड वाली दवाओं के नमूने शामिल हैं।
अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई शासन के निर्देश पर की गई है। पिछले चार दिनों के दौरान फैजाबाद ड्रग इंस्पेक्टर के साथ अंबेडकरनगर के ड्रग इंस्पेक्टर अनीत कुरील, बाराबंकी के ओमप्रकाश और अमेठी के नवीन कुमार ने शहर भर में दो दर्जन थोक और फुटकर दुकानाें से ऊंची कीमतों की प्रिंट रेट वाली दवाओं के नमूने संकलित किए हैं।
ड्रग इंस्पेक्टरों ने जिला अस्पताल के सामने मॉर्डन मेडिकल स्टोर, अल्का टावर स्थित न्यू सिटी मेडिकल स्टोर, शिवा फार्मा रिकाबगंज में छापेमारी की। इसके अलावा रिकाबगंज चौधरी फार्मा, वीनस फार्मा और खत्री फार्मा सहित अन्य दुकानों पर भी छापेमारी की गई है।
ड्रग इंस्पेक्टरों का कहना है कि शासन से सिटजिन दवा की कीमत 1.90 रुपया ही निर्धारित किया गया है। इसी दवा को बाजार में दो रुपए से लेकर पांच रुपए तक प्रति टेबलेट की दर से बेचा जा रहा है। ऐसे ही प्राइमाकार्ड, टैक्सिम, मोनोसेफ आरसीन-300 एमजी, जाइलोरिक, ट्रामाजैक, सेट्रीज ओफ्लामैके जैसी जीवन रक्षक दवाओं की कीमतें शासन से निर्धारित दर से अधिक हैं। बाजार में इन्हीं दवाओं को अलग अलग कंपनियां विभिन्न दरों से बेच रही हैं।