अयोध्या। एक तरफ मोदी व योगी सरकार अयोध्या में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है, तो वहीं अधिकारी व ठेकेदार इस पर पानी फेर रहे हैं। मंगलवार को ऐसा ही नजारा धर्मनगरी के रायगंज मोहल्ले में देखने को मिला।
यहां महाराष्ट्र के पर्यटकों से भरी एक मिनी बस अंडरग्राउंड बिजली लाइन के लिए खोदे गए गड्ढे में फंसकर पलटते-पलटते बची। स्थानीय लोगों ने इसमें सवार करीब 20 पर्यटकों को सुरक्षित बाहर निकाला।
बस में सवार लोगों व स्थानीय नागरिकों ने गड्ढे में फंसी बस को निकलवाने के लिए अधिकारियों समेत कार्यदाई संस्था से गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
बाद में किराए की क्रेन मंगवाकर बस को बाहर निकाला गया और पर्यटक व्यवस्था को कोसते हुए अपने गंतव्य को गए। अयोध्या में रायगंज-कनीगंज रेलवे क्रॉसिंग से जैन मंदिर तक अंडरग्राउंड केबल डालने के लिए एलएंडटी नामक संस्था कार्य करा रही है।
इसके लिए करीब पांच फुट गहरा गड्ढा खोदकर उसमें पाइप लाइन बिछाई गई है। लोगों का आरोप है कि संस्था द्वारा खुदाई के दौरान निकली भारी संख्या में मिट्टी को बेच दिया गया। अब जब गड्ढे को भरने की बारी आई तो मिट्टी कम पड़ गई।
थोड़ी बहुत मिट्टी डालकर पटाई तो कर दी लेकिन अब यह लोगों की जान पर भारी पड़ने लगी है। इस करीब आधा किमी. के रास्ते पर दो दर्जन से अधिक बड़े गड्ढे खुले हुए हैं।
मोहल्ले के बीच में मंगलवार सुबह महाराष्ट्र के पर्यटकों से भरी मिनी बस इन्हीं गड्ढों में धस गई और पलटते-पलटते बची। स्थानीय लोगों ने पर्यटकों को तो सकुशल नीचे उतार लिया लेकिन गड्ढे में फंसी बस को बाहर नहीं निकाल पाए।
कुछ देर बाद इससे कुछ ही मीटर आगे एक ट्रैक्टर-ट्रॉली व जैन मंदिर चौराहे पर गड्ढे में एक कार भी फंस गई। कार को तो लोगों ने किसी तरह निकलवा दिया, लेकिन ट्रॉली व बस गड्ढे में फंसे ही रही।
स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना नगर निगम, पॉवर कॉर्पोरेशन समेत कार्यदाई संस्था के अधिकारियों को दी, लेकिन कोई मदद के लिए नहीं आया। अंत में स्थानीय लोगों ने किराए की क्रेन का इंतजाम किया, करीब चार घंटे के बाद बस का बाहर निकाला गया।
बस में सवार करीब 20 महिला व पुरुष करीब चार घंटे तक सड़क किनारे बैठे गर्मी व भूख प्यास से तड़पते रहे। स्थानीय नागरिक चंद्रमणि पांडेय ने उन्हें अपने घर में बैठाकर जलपान आदि कराया।
महाराष्ट्र के पर्यटक मधुकर दथरथ केरे ने क्रोध व्यक्त करते हुए कहा कि स्थानीय लोगों से नंबर लेकर कई अधिकारियों से मिन्नत की लेकिन किसी ने उनकी पीड़ा को नहीं सुना।
कहा अगर स्थानीय लोग मदद को नहीं आते तो बड़ी मुश्किल होती। नयन मनोहर पाटिल ने कहा कि रास्ता न मालूम होने के कारण पुलिस वालों ने उन्हें इस तरफ मोड़ दिया। बताया बस के तिरछी होते ही महिलाएं चीखने चिल्लाने लगीं थीं।
स्थानीय लोगों ने ही हमें किसी तरह बाहर निकाला। स्थानीय निवासी शैलेंद्र अवस्थी, मनोज वर्मा, प्रदीप गुप्ता, संजय पांडेय, संतोष गुप्ता आदि ने बताया कि सभी पर्यटक बहुत डरे हुए थे। हम लोगों ने उनका हौसला बढ़ाया।
कार्यदाई संस्था के अधिकारी जसवंत सिंह ने बताया कि स्थानीय पार्षद के कहने पर खुदाई में निकली मिट्टी हटवाई गई थी। वहीं स्थानीय पार्षद प्रतिनिधि अभय श्रीवास्तव ने बताया कि खुदाई में निकली मिट्टी का ढेेर बीच सड़क पर लगा हुआ था।
मैंने ठेकेदार से कहा था कि मिट्टी को यहां से हटवाकर कही डंप करवा लो, इससे रास्ता खुल जाएगा। लेकिन ठेकेदार ने मिट्टी कही डंप कराने के बजाए उसे बेच दिया। इसकी शिकायत पहले भी नगर निगम आयुक्त से की गई थी।
इस समस्या को लेकर ‘अमर उजाला’ ने सोमवार के अंक में खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद भी अधिकारी नहीं चेते। न ही गड्ढों को भरवाने का इंतजाम किया गया न ही कार्यदाई संस्था से कोई सवाल जवाब किया गया। पर्यटकों की बस फंसने के बाद मंगलवार को अधिकारियों ने कार्यदाई संस्था को गड्ढे भरवाने के निर्देश दिए गए।
गड्ढों को पटवाने के लिए कार्यदाई संस्था को निर्देशित किया गया है। अगर किसी तरह की लापरवाही पाई गई तो आवश्यक कार्रवाई भी की जाएगी।- एके सिंह, चीफ इंजीनियर पॉवर कॉर्पोरेशन अयोध्या।