मॉडल रेलवे स्टेशन पर सोमवार भोर में अचानक जलापूर्ति ठप होने से हाहाकार मच गया। रेलवे स्टाफ समेत हजारों यात्रियों को प्रसाधन से लेकर पेयजल के लिए सांसत झेलनी पड़ी। रेलवे ने जांच कराई तो पता चला कि जलापूर्ति की मुख्य पाइप लाइन ही ध्वस्त हो गई है।
आननफानन में टीम लगाकर काम शुरू कराया गया, मगर पांच घंटे बाद ही जलापूर्ति बहाल हो सकी। इस दौरान भोर से लेकर दोपहर स्टेशन से गुजरी अप-डाउन की 13 ट्रेनों के हजारों यात्री और स्टाफ परेशान रहा। स्टेशन व प्लेटफार्म की धुलाई-सफाई भी ठप रही।
रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्मों के वाटर प्वाइंटों व वाटर हाईड्रेंटों से सुबह पांच बजे से ही पानी नहीं आ रहा था। सफाई कर्मियों ने प्लेटफार्म की धुलाई व सफाई के लिए पानी खोलने का एनाउंसमेंट करवाया। कुछ देर बाद यात्रियों के कहने पर दूसरी बार प्रसारण हुआ।
रेलवे ने जांच कराई तो मुख्य पाइप लाइन ध्वस्त पाई गई। सूचना मिलते ही एडीईएन एके वाजपेयी और सीनियर सेक्शन इंजीनियर एसआरआर रिजवी मौके पर पहुंचे। कर्मियों के साथ पाइप की मरम्मत कराने के लिए जूझते रहे।
इस दौरान अप साइड की फैजाबाद-लखनऊ पैसेंजर, मुजफ्फरपुर-सूरत एक्सप्रेस, कोलकाता-जम्मू तवी सियालदह एक्सप्रेस, वाराणसी-लखनऊ पैसेंजर, धनबाद-फिरोजपुर किसान एक्सप्रेस, प्रयाग-फैजाबाद पैसेंजर, डाउन साइड की दिल्ली-छपरा एक्सप्रेस आदि ट्रेनों के यात्री पानी के लिए परेशान रहे।
किसी भी नल में एक बूंद पानी नहा था। दिक्कतों से एनसीसीसी के करीब सौ छात्र-छात्राएं व उनके गुरुजन भी जूझे। इनका कहना था उनकी ट्रेन दिल्ली मालदा एक्सप्रेस लेट हो गयी है।
स्टेशन पर कही पानी नहीं आ रहा है।
ट्रेन पकड़ने स्टेशन पहुंचे बारुन के प्रेम कुमार, बीकापुर के दिलीप, रायपुर के चंदन सिंह, बाराबंकी के जियामुल का कहना था कि आपूर्ति सुबह से ठप है। बोतल बंद पानी भी कम पड़ गए। कड़ी मेहनत के बाद सुबह 11:30 बजे के करीब आपूर्ति शुरू हुई तो गिने-चुने वाटर प्वाइंटों से देर तक मटमैला गंदा पानी आता रहा।