सुप्रीम कोर्ट के सुझाव के बाद बुधवार को रामजन्मूमि/बाबरी मस्जिद मामले के कुछ पक्षकार बुधवार को हनुमानगढ़ी में सुलह-समझौते की कोशिशें करते दिखे। महंत ज्ञानदास की अगुवाई में शुरू हुए प्रयास में दोनों पक्षों में इस बात पर एक राय बनती दिखी कि अधिग्रहित 2.77 एकड़ में ही मंदिर और मस्जिद बने।
सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने वाले डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी को उन्होंने बाहरी कहते हुए मामले को उलझाने की बात कही। सरयू पार मस्जिद बनाने की उनकी बात का विरोध हुआ। कहा गया कि दोनों पक्षों की पैरवी में तमाम कट्टरपंथी सुलह नहीं होने देते।
हनुमानगढ़ी में बुधवार को रामजन्मभूमि के पक्षकार निर्मोही अखाड़े से पुजारी रामदास और बाबरी मस्जिद की ओर से मरहूम मुद्दई हाशिम अंसारी के पुत्र व पक्षकार इकबाल अंसारी के बीच वार्ता हुई।
इस दौरान जयपुर से आए अग्रदेवाचार्य समेत फुलडोल दास, निर्मोही अखाड़े के सुंदर दास, वृंदावन के सिंहपौर आदि भी शामिल हुए। महंत ज्ञानदास ने कहा कि हमने सुलह की कोशिश पहले भी की थी, लेकिन बाहरी लोग मामले का हल नहीं होने देते।
अब डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी ने गलत बात की है, वे मस्जिद को सरयू पार बनाने की बात करते हैं। जबकि यहां का हिंदू-मुसलमान एक साथ रहता है। सब चाहते हैं कि मंदिर गर्भगृह में बने और मस्जिद आरा मशीन के पास अधिग्रहित भू-भाग पर बने।
इसके समर्थन में पुजारी रामदास ने कहा कि हम चाहते हैं कि हिंदू-मुसलमान आपसी एकता से रहें। जो लोग कट्टरता की बात करते हैं, वे अयोध्या की गंगा-जमुनी तहजीब को नहीं समझते। मंदिर विराजमान रामलला के गर्भगृह पर ही बनेगा।
मस्जिद भी अधिग्रतिह परिसर में एक तरफ बने, इसमें कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि महंत ज्ञानदास 2010 में भी निर्णायक पहल के करीब थे, यहां हिंदू-मुसलमान सभी एक साथ बैठे थे लेकिन बाहरी अड़चन से सुलह नहीं हो सका। इकबाल अंसारी ने कहा कि हम चाहते हैं कि रामलला का मंदिर बने, फसाद कोई नहीं चाहता।