भारत केसरी मास्टर चंदगीराम, नेत्रपाल, मेहरदीप, भारत भीम जनार्दन सिंह के साथ ही दारा सिंह के भाई रंधावा को अखाड़े में धूल चटाने वाले मल्लविद्या (कुश्ती) में अयोध्या के सिरमौर रहे हिंद केसरी बाबा हरिशंकर दास की सांसों की डोर बुधवार की भोर टूट गई। वह 92 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर पर संत समाज से लेकर जनमानस शोक में डूब गया। सरयू तट पर संत परंपरा के अनुसार उनका अंतिम संस्कार किया गया।
अयोध्या से सटे जिले बस्ती के पाकड़डाड़ गांव में पिता वंशराज पांडेय व माता सीता देवी के घर में पैदा हुए बाबा हरिशंकर दास ने नौ वर्ष की अवस्था में ही हनुमानगढ़ी में हनुमंत लला की सेवा का संकल्प ले वैराग्य धारण कर लिया।
यहीं पर गुरु अवध बिहारी दास के शिष्य के रूप में मंदिर के प्रवेश द्वार के पास स्थित आवास पर रहने लगे। हनुमानगढ़ी में नगा साधुओं की कुश्ती को देख पहलवान बनने की ठानी तो पीछे मुड़कर नहीं देखा। 1968 में पहला बड़ा खिताब इलाहाबाद में हुई कुश्ती में प्रदेश केसरी के रूप में अर्जित किया।
देश की कुश्ती में अयोध्या का लोहा मनवाने का उनका सफर वर्ष 1970 में इलाहाबाद में भारत भीम जनार्दन सिंह व दारा सिंह के भाई रंधावा को अखाड़े धूल चटाने के साथ शुरू हुआ। वर्ष 1972 में शामली हरियाणा में सेना के पहलवान भारत केशरी नेत्रपाल को अखाड़े में चित कर कुश्ती के सर्वोच्च सम्मान हिंद केसरी की उपाधि से विभूषित किया गया।
वर्ष 1976 में एशियन चैंपियन पहलवान पन्ना लाल को पटखनी दी थी। इसके बाद वह देश व प्रदेश में कुश्ती में कई पहलवानों को अपने दांव से अचंभित करते रहे। अस्वस्थता के कारण वर्ष 1995 से वह अखाड़े से दूर हो गए।
उनके उत्तराधिकारी बलराम दास बताते हैं कि लगभग माह भर से वह फेफड़े में इंफेक्शन से पीड़ित थे। इलाज के बाद वह आवास पर ही स्वास्थ्य लाभ ले रहे थे। मंगलवार की मध्य रात्रि तबियत अचानक खराब हो गई और बुधवार की भोर अंतिम सांस ली।
उनके निधन पर हनुमानगढ़ी शोक में डूब गया। उनके आवास पर साधु-संतों व नागरिकों की भीड़ अंतिम दर्शन के लिए लगी रही। दूसरी बेला सरयू तट पर संत परंपरा के अनुसार जल समाधि देकर अंतिम संस्कार किया गया।
अंतिम संस्कार यात्रा में हनुमानगढ़ी सागरिया पट्टी के महंत ज्ञानदास, उज्जैनिया पट्टी के महंत संतराम दास, बासंतिया पट्टी के महंत रामचरन दास, हरद्वारी पट्टी के महंत मुरली दास, महंत धर्मदास, सरपंच रामदास, भवनाथ दास, रामकुमार दास, मनमोहन दास, अवधेश पहलवान, संजय दास, हेमंत दास, रामकरन दास, रमेश दास, राजू दास, नागा हरिदास, रामकृष्ण दास, रामभद्र दास, दिनेश दास, केदारदास, दिलीप दास, अजीत दास, प्रेम दास, श्रवण दास, राजेश पहलवान, चेतन दास, मनीराम दास आदि संत व नागरिक मौजूद रहे।