अयोध्या। राम जन्मभूमि पर भव्य राममंदिर निर्माण के साथ-साथ अयोध्या के कायाकल्प को लेकर भी कई योजनाओं पर काम चल रहा है। अयोध्या शीघ्र ही रामायण पर रिसर्च का भी एक बड़ा केंद्र बनने जा रही है।
श्रीराम जन्मभूमि से सटे अमांवा राममंदिर में रामायण रिसर्च इंस्टीट्यूट की स्थापना की जाएगी। इस इंस्टीट्यूट में दुनिया भर में उपलब्ध विभिन्न भाषाओं की पांडुलिपियां भी संरक्षित होंगी।
साथ ही साथ देश-दुनिया के लिए यह रामायण पर रिसर्च करने का एक बड़े केंद्र के रूप में भी स्थापित होगा। अमांवा राममंदिर के प्रमुख व पटना महावीर मंदिर के ट्रस्टी सेवानिवृत्त आईपीएस किशोर कुणाल अयोध्या को रामायण पर शोध का बड़ा केंद्र बनाने की तैयारी कर रहे हैं।
किशोर कुणाल ने राममंदिर निर्माण के लिए भी अपनी न्यास की ओर से 10 करोड़ देने का एलान किया है, वे अब तक चार करोड़ का निधि समर्पण राममंदिर ट्रस्ट को कर चुके हैं।
साथ ही अमांवा मंदिर में प्रतिदिन निशुल्क राम रसोई व 200 लॉकर युक्त अमानती घर का संचालन भी कराया जा रहा है। अब वे अयोध्या में रामायण पर केंद्रित एक बड़े इंस्टीट्यूट की स्थापना करने की तैयारी में हैं।
किशोर कुणाल ने बताया कि विश्व के करीब 120 देशों में राम व रामायण की मान्यता है। 70 से अधिक देशों में रामलीला का मंचन किया जाता है। ऐसे में जहां से राम व रामायण का उद्भव हुआ, वहां वृहद रिसर्च सेंटर स्थापित होना आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि अमांवा मंदिर के परिसर में वृहद रिसर्च इंस्टीट्यूट खोले जाने की योजना है। इसका मास्टर प्लान तैयार किया जा चुका है। साथ ही साथ संस्कृत विद्यालय की भी स्थापना की योजना है।
बताया कि राम के नाम पर स्थापित होने वाले शोध केंद्र में दुनिया भर में उपलब्ध विभिन्न भाषाओं की रामायण की पांडुलिपि भी संरक्षित की जाएगी। वाल्मीकि रामायण से लेकर संस्कृत व अन्य भाषाओं की रामायण पर रिसर्च किया जाएगा।
तमिल, तेलगू, कन्नड़, हिंदी, समेत अन्य भाषाओं में मौजूद रामकथा पर भी शोध किया जाएगा। देश-विदेश के लिए यह इंस्टीट्यूट शोध का एक बड़ा केंद्र बने ऐसी हमारी तैयारी है।
उन्होंने बताया कि रामायण इंस्टीट्यूट में रिसर्च स्कॉलर भी रखे जाएंगे। जो सभी विषयों पर तुलनात्मक अध्ययन करेंगे। इस योजना को लेकर काम शुरू हो चुका है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भी किशोर कुणाल ने अपनी योजना से अवगत करा दिया है।
किशोर कुणाल ने बताया कि इंस्टीट्यूट की पहली दो किताबें मार्च में प्रकाशित होंगी। पहली किताब का नाम रामो विग्रहवान धर्म:...व दूसरी किताब का नाम वाल्मीकि रामायण... है।
रामो विग्रहवान धर्म:..पुस्तक रामायण पर शोध करने का एक बड़ा आधार बनेगी। उन्होंने बताया कि इंस्टीट्यूट पर रामकथा व रामायण का पुस्तकालय भी बनेगा।
यहां इंडोनेशिया, थाईलैंड, मलेशिया, त्रिनिडाडा एवं टोबैगी, श्रीलंका समेत अन्य देशों में होने वाली रामायण व राम कथाओं का भी पुस्तकालय बनाया जाएगा।