गाजे-बाजे व जय श्री राम के गगनभेदी जयकारों के बीच सोने व चांदी की पालकी व रथों पर विराजमान भगवान श्रीराम-सीता, लक्ष्मण व हनुमान के मनमोहक विग्रहों की शोभायात्रा निकाली गई।
श्रावण शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तक चलने वाले इस मेले के दौरान प्रमुख मंदिरों में देर रात तक विभिन्न सांस्कृतिक व धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी।
श्रावण शुक्ल पक्ष की त्रितियां को प्रारंभ होने वाले इस ऐतिहासिक मेले में परंपरानुसार प्रमुख मठ-मंदिरों, कनक भवन, हनुमानएगढ़ी, श्रीमणिराम दास की छावनी, दिव्य शीश महल, श्रीराम वल्लभाकुंज, राम हर्षण कुंज, अशर्फी भवन, बड़ा स्थान, विअहुति भवन आदि मंदिरों से गाजे-बाजे व जय श्री राम के नारों के बीच भगवान के विग्रहों की आकर्षक व मनमोहक पालकियों व रथों पर यात्रा निकाली गई।
रास्ते में जगह-जगह भगवान के विग्रहों की भक्तों ने आरती उतारी और पुष्प वर्षा की गई। शाम को मणि पर्वत पर पहुंचीं पालकी व रथों पर विराजमान भगवान के विग्रहों का झूला बिहार कराया गया। दूसरी बेला शुरू हुआ यह क्रम देर शाम तक चलता रहा।
मणिपर्वत की पावन भूमि पर विग्रह भगवान के झूलनोत्सव की मनमोहक छटा का दर्शन लाभ लेने के लिए देश भर से पहुंचे श्रद्धालु भक्तों की भारी भीड़ रही। देर शाम यात्रा मंदिरों को वापस लौट आई। मणिपर्वत पर झूला बिहार के बाद से नगरी के सभी मठ-मंदिरों के जगमोहन में झूले पड़ गए।
श्रावणी पूर्णिमा 29 अगस्त तक चलने वाले इस महोत्सव के तहत मंदिरों में कजरी गीतों के साथ भजन-संगीत व नृत्य के कार्यक्रम भी शुरू हो गए हैं। श्रद्धालुओं की भीड़ अपने आराध्य के दर्शन के लिए जुटने लगी है।