अयोध्या। रामनगरी में होटल, लॉज व नर्सिंग होम सहित अन्य व्यवसायिक कार्य करना मंहगा हो गया है। इसके लिए नगर निगम ने अपने बोर्ड की बैठक में नए व्यवसायिक शुल्क को मंजूरी दे दी है। इसमें होटल, प्रसूति गृह, प्राइवेट अस्पताल व शराबों की दुकानों का शुल्क पांच गुना से अधिक बढ़ा दिया है। इससे शहर के कारोबारियों में रोष है। हालांकि यह माना जा रहा है कि इस नए व्यवसायिक शुल्क के लागू हो जाने से शहर की जनता पर ही बोझ बढ़ेगा।
अयोध्या के विकास के लिए प्रदेश सरकार सतत प्रयास कर रही है। इसमें अयोध्या में देश-विदेश के बड़े कारोबारियों को बसाने के लिए कई योजनाओं पर कार्य कर चल रहा है। अयोध्या में देश व विदेशी कंपनियों के लगभग 55 होटल व कई विश्वस्तरीय हॉस्पिटल सहित कई अन्य कार्य प्रस्तावित हैं। इस सबको स्थापित करने के लिए प्रदेश सरकार पूरी तरह से प्रयासरत है। इस सबके इतर नगर निगम प्रशासन ने अपने व्यवसायिक लाइसेंस शुल्क में बढ़ोत्तरी कर दी है।
नगर निगम की बोर्ड की बैठक में विविध कर विभाग की ओर से लाइसेंस शुल्क में बढ़ोत्तरी करने का प्रस्ताव आया था। इसमें व्यवसायिक लाइसेंस को लगभग दोगुना करने का प्रस्ताव था लेकिन जब यह प्रस्ताव बोर्ड की बैठक में रखा गया तो पार्षदों की ओर से ठेला, टैक्सी, बैलगाड़ी, रिक्शा व आटो रिक्शा के अलावा अन्य व्यवसायिक कार्यों का लाइसेंस शुल्क बढ़ाने की बात कही गई। इसके बाद होटल, लॉज, नर्सिंग होम, प्राइवेट अस्पताल समेत शराब की दुकानों का व्यवसायिक लाइसेंस शुल्क पांच गुना से अधिक बढ़ा दिया गया है। बोर्ड के निर्णयों के अनुसार अब यह नया व्यवसायिक लाइसेंस शुल्क को लागू किया जाएगा।
मद का नाम वर्तमान दर लागू होने वाली दर
होटल व लॉज 20 बेड तक 1000 5000
होटल व लॉज 20 बेड के ऊपर 1000 10000
तीन सितारा होटल 9000 35000
पांच सितारा होटल 12000 50000
नर्सिंग होम 20 बेड तक 2000 10000
नर्सिंग होम 20 बेड के ऊपर 5000 25000
प्रसूति गृह 20 बेड तक 4000 10000
प्रसूति गृह 20 बेड के ऊपर 5000 25000
प्राइवेट अस्पताल 5000 25000
प्राइवेट अस्पताल 5000 15000
पैथालॉजी सेंटर 1000 3000
एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, एमआरआई, सिटी स्कैन 2000 5000
बियर बार 6000 20000
देशी शराब 6000 20000
विदेशी शराब 12000 25000
नगर निगम बोर्ड में विपक्षी दल के नेता हाजी असद का कहना है कि व्यवसायिक लाइसेंस शुल्क में बेतहाशा की गई व्यवसायिक लाइसेंस शुल्क में वृद्धि से आम जनता पर ही बोझ बढ़ेगा। वह कहते हैं कि शुल्क जमा करने के बाद यह धनराशि दुकानदार शहर के आम लोगों से ही वसूलेंगे। इसका असर सीधे जनता पर दिखाई देगा। उनका कहना है कि विविध कर विभाग के प्रस्तावित शुल्क को मंजूरी मिलनी चाहिए थी लेकिन पार्षदों की मांग पर इसमें पांच गुना के आसपास वृद्धि की गई है। हालांकि इस संबंध में अपर नगर आयुक्त सच्चिदानंद सिंह से बात करने की कोशिश की गई तो उनका फोन नहीं उठा।