अयोध्या। राम विवाह के अवसर पर पावन सलिला सरयू के तट पर संस्कृति विभाग से आयोजित 39वें रामायण मेला के चौथे दिवस की सांस्कृतिक संध्या में राष्ट्रपति, राज्यपाल व मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित लखनऊ की दिव्यांग कलाकार शबीना शैफी ने अपनी प्रस्तुति से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। सांस्कृतिक संध्या की शुरूआत भगवान श्रीराम के स्तुति गीत श्रीराम चन्द्र कृपालु भजु मन हरण भव भय दारुणम... से हुई।
इससे पूर्व आयोजन के प्रथम सत्र में सजीवन मिश्रा व उनके दल द्वारा राम विवाह व राजगद्दी की लीला का मंचन किया गया। लखनऊ से पधारे सुरेश कुशवाहा एण्ड पार्टी द्वारा भजन गीतों की प्रस्तुति ने रामायण मेले की चतुर्थ सांस्कृतिक संध्या में भक्ति भाव की अविरल अभिव्यक्ति रामहि राम रटन लागी जिभिया हो... अंगना में बबुरइया लगइबा तो कैसे के आम होय जायी... गीतों की सराहनीय प्रस्तुति से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। दूसरे सहयोगी गायक सूरज नारायन ने बड़े ही ओजस्वी स्वर में हर हाल में खुश रहना संतो से सीख जाये, महफिल से जुदा रहना संतो से सीख जाये... व जीवन तो भैया एक रेल है, कभी पैसेंजर तो कभी मेल है.. की प्रस्तुति प्रशंसनीय रही।
अंतिम प्रस्तुति के रूप में अयोध्या के संत मानवेंद्र दास ने अपने भजनों की प्रस्तुति से आकर्षण चुराया। नवोदित कलाकार तान्या मिश्रा के द्वारा प्रस्तुत राम विवाह गीत आज जनक नगरिया निहाल सखियां, सब मिल गावो मंगल चार सखियां... प्रशंसनीय रही। इससे पूर्व रामायण मेले के अंतिम दिवस की सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ मुख्य अतिथि अयोध्या नगर निगम के मेयर ऋषिकेश उपाध्याय ने किया। संस्कृति विभाग के कार्यक्रम अधिशासी व रामायण मेला के नोडल अधिकारी कमलेश कुमार पाठक, प्रशासनिक अधिकारी अयोध्या शोध संस्थान रामतीरथ ने अतिथियों व कलाकारों का सम्मान किया।