अयोध्या। विश्वभर में लोकप्रिय रामकथा वैदिक परंपरा का ही प्रसार करती है। रामायण मेले के आयोजन से रामराज्य का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। घर-घर में रामायण का पाठ होना चाहिए। कलयुग में यदि हर घर में राम और रामायण को स्थान दिया जाए तो जीव का कल्याण निश्चित है। भगवान श्रीराम का एक भी आचरण यदि हम अपने जीवन में लाएंगें तो जीवन सार्थक हो जाएगा। उक्त बातें मणिरामदास की छावनी में उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास ने रामायण मेले के समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहीं।
उन्होंने कहा कि रामायण के अनुसार यदि हम अपना जीवन क्रम बना लें तो आज भी रामराज्य का स्वप्न साकार हो सकता है। जीवन का आधार रामनाम ही है। संत समिति के अध्यक्ष महंत कन्हैयादास रामायणी ने कहा कि राम नाम की महिमा का प्रताप ही है कि अयोध्या में भव्य राममंदिर का निर्माण हो रहा है। वह कल्पना साकार हो रही है जो लगभग अकल्पनीय हो चुकी है। ऐसे में रामनाम को जीवन की डोर से बांध लिया जाए हर असंभव काम संभव हो जाता है।
महंत रामशरण दास रामायणी ने कहा कि राम नाम मणिदीप की तरह है जो कभी बुझता ही नहीं है। जैसे दीपक को चौखट पर रख देने से घर के अंदर और बाहर दोनों हिस्से प्रकाशित हो जाते हैं वैसे ही रामनाम को जपने से अंत:करण और बाहरी आचरण दोनों प्रकाशित हो जाते हैं। रामनाम ही मुक्ति का मार्ग है। समापन सत्र का संचालन कमलेश सिंह ने किया। इस दौरान ज.गु.गोविंदाचार्य, हनुमान दास, राधेश्याम पांडेय, रामायण मेला समिति के महामंत्री शीतला सिंह, नागा रामलखन दास, दीपकृष्ण वर्मा, नंद कुमार मिश्र, आचार्य स्मृति शरण सहित अन्य मौजूद रहे।