फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आठ माह से बंद है रामलीला, 400 कलाकार बेरोजगार

विज्ञापन
रामलीला का मंचन करते कलाकार।(फाइल फोटो) - फोटो : FAIZABAD
विज्ञापन
अयोध्या। कोरोना के चलते अनवरत रामलीला का मंचन पिछले आठ माह से बंद है, जिसके कारण करीब 400 कलाकारों के समक्ष जीवन यापन का संकट खड़ा हो गया है। बेरोजगारी का दंश झेल रहे राम, लक्ष्मण, भरत, रावण आदि का अभिनय करने वाले कलाकारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। कलाकारों ने अनवरत रामलीला मंचन शुरू करने की मांग की है।
विज्ञापन

कोरोना के चलते विगत 21 मार्च से ही लॉकडाउन लगने के साथ ही अयोध्या शोध संस्थान में वर्ष 2004 से संचालित अनवरत रामलीला बंद चल रही है। जिसके चलते अयोध्या ही नहीं देश के कोने-कोने में अपने संवाद और अभिनय की छाप छोड़ने वाले ये कलाकार रोजगार के लिए परेशान हैं।
अनवरत राम लीला के आयोजन करने वाली संस्था अयोध्या शोध संस्थान के सूत्रों के मुताबिक अनवरत रामलीला से स्थानीय स्तर के करीब 400 कलाकार जुड़े हुए हैं। इसके बंद हेाने से उनकी रोजी रोटी के साधन बंद हो गए है।
विज्ञापन

इसको देखते हुए विगत दिनों संस्थान द्वारा शासन से रामलीला की अनुमति मांगी गई थी। चूंकि अयोध्या शोध संस्थान के रिमॉडलिंग का काम इस बीच शुरू हो गया जिसके बाद ओपन रामलीला की अनुमति मिली।
निर्णय हुआ कि एक अक्तूबर से रामकथा पार्क में कोरोना गाइडलाइन के बीच ओपन रामलीला का मंचन शुरू किया जाएगा, लेकिन अचानक फिर कोरोना का हवाला देते हुए ओपन रामलीला मंचन को भी रोक दिया गया।
रामलीला कलाकारों का कहना है कि सब सारे कार्यक्रमों की अनुमति कोरोना प्रोटोकॉल के तहत दी जा चुकी है तो अनवरत रामलीला का मंचन भी फिर से शुरू किया जाना चाहिए। अयोध्या शोध संस्थान के सूत्रों का कहना है कि अनवरत रामलीला मंचन के लिए शासन से अनुमति मिल गई है, जिला प्रशासन की अनुमति मिलते ही मंचन प्रारंभ कर दिया जाएगा।
1 लाख 32 हजार रुपये मिलता पारिश्रमिक
एक साल में करीब 24 रामलीला मंडलियां अनवरत रामलीला का मंचन करती हैं जिसमें करीब 400 स्थानीय व दो सौ बाहरी कलाकारों को रोजगार मिलता है। एक रामलीला मंडली 15 दिनों तक अनवरत रामलीला का मंचन करती है। उसके बाद दूसरी मंडली को मौका दिया जाता है। 15 दिनों तक अनवरत राम लीला का मंचन करने पर प्रत्येक दल को करीब 1 लाख 32 हजार रुपये का पारिश्रमिक मिलता है। बाहर से आने वाले दलों को दूरी के हिसाब से यात्रा, ठहरने और भोजन वगैरह का भी भुगतान तय किया गया है।
रोजगार को लेकर परेशान हैं रामलीला कलाकार
देश-विदेश में रामलीला मंचन कर पहचान बनाने वाले महंत मनीष दास कहते हैं कि सरकार ने जब सभी धार्मिक कार्यक्रमों की अनुमति दे दी है तो अनवरत रामलीला मंचन को क्यों बंद रखा गया है। बताया कि अनवरत रामलीला मंचन से सैकड़ों रामलीला कलाकारों को रोजगार मिल जाता था। अनवरत रामलीला बंद होने के बाद से ही इन कलाकारों की सुध भी किसी ने नहीं ली जिसके चलते अधिकांश कलाकार भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं। रामलीला कलाकार विश्राम पांडेय व गणेेश झा ने भी अनवरत रामलीला मंचन को शुरू कराने की मांग की है। कलाकारों ने कहा कि आठ माह से रामलीला मंचन बंद होने के कारण रोजगार के नए अवसर तलाशने के लिए हम भटक रहे हैं। रामलीला में शास्त्रीय कलाकारों की भी अहम भूमिका होती है ऐसे में रामलीला बंद होने से इन शास्त्रीय कलाकारों के समक्ष भी महीनों से संकट है। राजकुमार झा, लाल जी मलिक, विनोद शरण सहित अन्य शास्त्रीय कलाकारों को भी अनवरत रामलीला मंचन फिर से शुरू होने का इंतजार है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें