सोहावल। ग्राम पंचायत मोइया कपूरपुर पिछली पंचायत चुनाव से गंवई राजनीति के घमासान ने पंचायत के लोगों की नींद उड़ा रखी है। जांच सही दिशा में गयी तो कई लोग कार्यवाही और जवाबदेही के शिकंजे में आ सकते हैं। जिला अधिकारी ने दोषी मानते हुए प्रधान सीमा सिंह को अधिकार व दायित्व से मुक्त करने के बाद अब जांच की जिम्मेदारी अध्यक्ष ग्राम्य विकास संस्थान व अधिशाषी अभियंता लोनिवि खंड दो को सौंपी है।
आरोप है कि गत चकबंदी के दौरान गांव के कुछ दबंग लोगों की साजिश से पंचायत की सरकारी जमीन का जमकर उलटफेर हुआ। समूचा गांव तालाब में दर्ज हो गया और आबादी नवीन परती, घूर-गड्ढा आदि की कीमती जमीनों को अपने नाम सर्वे कराकर कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया। मामला उच्च न्यायालय तक विचाराधीन है। गांव के चकबंदी मामले में फैसला करने वाले तत्कालीन डीडीसी फर्जी पाए गए तो तत्कालीन जिलाधिकारी ने केस दर्ज कराया और जेल गए। इसी पंचायत के पिछले चुनाव के बाद सरकारी जमीन के दुरुपयोग और अवैध कब्जेदारी को लेकर शिकायत प्रमुख सचिव से डीएम तक आई तो कई स्तर पर जांच शुरू हुई।
जांच रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया अधिकार और दायित्व में लापरवाही का दोषी मानते हुए जिलाधिकारी ने आदेश जारी कर प्रधान सीमा सिंह के सभी अधिकार छीन लिए और विरत कर गांव के राज बक्श, बिद्या प्रकाश, हरीलाल को सदस्य नामित कर विकास कार्य संचालन की जिम्मेदारी सौंपी है। साथ ही लोनिवि खंड दो के अधिशाषी अभियंता व ग्राम्य विकास विभाग के अध्यक्ष को अंतिम जांच अधिकारी नियुक्त किया है। खंड विकास अधिकारी प्रशांत नागर ने बताया कि प्रधान के अधिकार समाप्त करने व जांच का आदेश आया है।