बीकापुर। कोतवाली क्षेत्र के परूआ गांव की रहने वाली स्नातक की छात्रा की हत्या को लेकर सवाल उठने लगे हैं। पुलिस की निष्क्रियता को घटना का बड़ा कारण माना जा रहा है। इस बीच कांग्रेस और शिवसेना के लोगों ने गांव का दौरा किया। मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए। पीड़ित परिवार की सुरक्षा को लेकर पुलिस सक्रिय हो गई है। गुरुवार को पीड़ित परिवार के घर पर कड़ा पहरा रहा।
कोतवाली क्षेत्र के परूवा गांव की स्नातक की छात्रा ज्योति पुत्री राम प्रताप का शव एक मिमी दूर बसंतापुर गांव के पास गन्ने के खेत में नीम के पेड़ से लटकता मिला था। वह बीते एक माह से लापता थी। ज्योति के पिता गुमशुदगी दर्ज कराने के बाद आशंका जताता रहा कि उसकी पु त्री का अपहरण किया गया लेकिन पुलिस लगभग माह भर गुमशुदगी दर्ज करने के बाद शांत बैठी रही। आरोपी को पूछताछ के लिए लाने के बाद भी छोड़ दिया गया।
जबकि पीड़ित ने सीओ और एसएसपी से शिकयत भी की। बीते सोमवार को सड़ा-गला शव मिलने के बाद पुलिस ने कुछ घंटे पहले ही अपहरण का केस दर्ज लिया, फिर आनन फानन में आरोपी पड़ोसी गांव सराय भनौली के रहने वाले नसरूद्दीन उर्फ शेरू खान को गिरप्तार कर हत्या की धारा बढ़ा दी। लोगों का कहना है कि आरोपी दिव्यांग है, अकेले घटना को अंजाम कैसे दे सकता है, इसकी गहराई से जांच होनी चाहिए, पुलिस की भूमिका पहले से संदिग्ध रही है, वह किसी को बचाने में लगी है।
गुरुवार को कांग्रेस के जिलाध्यक्ष अखिलेश यादव पीड़ित के घर पहुंचे। उन्होंने घटना की निंदा के साथ ही पीड़ित परिवार को मुआवजा दिए जाने की मांग की। कहा कि प्रदेश सरकार बालिकाओं और महिलाओं की सुरक्षा के प्रति संवेदनशील नहीं है। शिव सेना नेता और पूर्व जिला पंचायत सदस्य संतोष दूबे ने भी परिवार के प्रति संवेदना जताई। पुलिस की कार्यप्रणाली पर आक्रोश जताया। कहा कि पुलिस चेत जाती तो छात्रा की जान बच सकती थी।
एक महीने तक छात्रा घर से लापता रही और पुलिस उदासीन बनी रही। मामले में और भी सूत्रधार हो सकते हैं। अन्य आरोपियों को प्रकाश में लाया जाना चाहिए। परिवार को 50 लाख रूपये मुआवजे की मांग की। उधर, पीड़ित के घर आधा दर्जन पुलिसकर्मियों का पहरा बरकरार है। गुरुवार को एसआई सतीश चंद्र, सिपाही संदीप यादव, अमितेश सिंह सहित आधा दर्जन पुलिसकर्मी पीड़ित के घर पहरेदारी करते नजर आए।