अयोध्या। हर व्यक्ति का सपना होता है कि उसका भी एक घर हो, लेकिन अयोध्या विकास प्राधिकरण (एडीए) की नाकामी से गरीब और मध्यम वर्ग का यह सपना पूरा नहीं हो पा रहा है। क्योंकि प्राधिकरण के पास न तो इनके लिए आवासीय योजनाएं बनाने के लिए जमीन है और न ही जमीन खरीदने का पैसा।
केंद्र सरकार की मंशा है कि हर व्यक्ति के पास अपना घर हो। शहरी क्षेत्रों में किफायती दाम में गरीब और मध्यम वर्ग को अपना घर मिल सके। इसके लिए प्रदेश सरकार ने अफोर्डेबल पॉलिसी 2014 बनाई। मगर अयोध्या में इस नीति का कोई लाभ उन लोगों को नहीं मिल सका। जो किराये के घरों में रह रहे हैं। क्योंकि एडीए ने जानकी विहार के रूप में अपनी अंतिम आवासीय योजना बनाई थी। जिसमें महज 135 ही आवास बने थे।
इतनी कम संख्या में आवास बनने से अयोध्या में लोगों की जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही हैं। शहर में हजारों की संख्या में लोग किराये के मकानों में रह रहे हैं और वे अपने लिए घर की तलाश में हैं। ऐसे में लोग परेशान होकर अपने घर के लिए निजी कोलोनाइजर्स व बिल्डर्स के पास जा रहे हैं। जहां उन्हें ज्यादा दाम भी चुकाने पड़ रहे हैं और कॉलोनियां भी वैध नहीं हैं।
क्यों नहीं बनाया लैंड बैंक
अयोध्या बहुत पुराना विकास प्राधिकरण है। इसके बावजूद यहां तैनात रहे अधिकारियों ने लैंड बैंक नहीं बनाया। मौजूदा अधिकारियों का भी इस दिशा में कोई ठोस प्रयास नहीं दिखा। जिसका खामियाजा आने वाले वर्षों तक जरूरतमंद नागरिकों को भुगतना पड़ेगा।
जमीन और भवन की कीमतें भी ज्यादा
विकास प्राधिकरण की ओर से आवासीय योजनाएं न होने के कारण निजी कोलोनाइजर्स व बिल्डर्स महंगे दामों में अपने मकान और प्लाट बेच रहे हैं। इसकी वजह से बाजार भाव भी चढ़ा हुआ है।
अभी शहर में आवासीय कॉलोनी के लिए विकास प्राधिकरण के पास जमीन नहीं है। लैंड बैंक तैयार करने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन बजट का भी संकट है।- सत्येंद्र सिंह, सचिव, अयोध्या विकास प्राधिकरण