अयोध्या। वर्ष 2004 से भरण पोषण की धनराशि पाने के लिए कोर्ट कचहरी की दौड़ लगा रही महिला को आखिरकार 19 साल बाद न्याय मिला। कोर्ट ने पति का मकान कुर्क कर महिला की गुजारा भत्ता राशि वसूलने का आदेश दिया है। यह आदेश अपर प्रधान न्यायाधीश पारिवारिक न्यायालय एकता सिंह की कोर्ट ने शुक्रवार को दिया।
याची के अधिवक्ता संतोष कुमार शुक्ला ने बताया कि रामावती निवासी मिर्जापुर माफी थाना कोतवाली अयोध्या की शादी वर्ष 1994 में जग प्रसाद निवासी गद्दोपुर सूबेदार का पुरवा के साथ हुई थी। दोनों का बेटा अभिषेक भी हुआ, जो अब 24 वर्ष का हो गया है। रामावती के ससुराल वाले दहेज में स्कूटर न दिए जाने पर उसे उत्पीड़ित कर रहे थे। मायकेवालों की तरफ से दहेज की मांग पूरी न करने पर पति और ससुराल वालों ने वर्ष 2004 में उसे घर से भगा दिया।
पुलिस के चक्कर लगाने के बाद रामावती ने गुजारा भत्ता पाने के लिए वर्ष 2004 के अंत में अदालत में याचिका प्रस्तुत की। इस पर हुई सुनवाई के बाद 7 अगस्त 2015 को तत्कालीन न्यायाधीश विश्वनाथ ने याचिका दाखिल करने की तिथि से रामावती को पांच सौ और पुत्र अभिषेक को पांच सौ रुपये प्रतिमाह भरण पोषण भत्ता दिए जाने का आदेश दिया। यह रकम जग प्रसाद ने नहीं दी तो बकाया धनराशि 1,42,000 रुपया पाने के लिए अक्तूबर 2015 में रामावती ने कोर्ट में निष्पादन वाद दाखिल किया। इसमें रिकवरी वारंट जारी होने के बाद भी जग प्रसाद कोर्ट में हाजिर नहीं हुआ। भरण पोषण की धनराशि न देना पड़े इसके लिए विपक्षीगण ने अपना मकान भी मंजुला चौधरी निवासी चंदौली रसूलपुर टांडा अंबेडकरनगर को बेच दिया। जानकारी होने पर रामावती ने अदालत में मकान को कुर्क करने के लिए प्रार्थना पत्र दिया। इस पर मकान कुर्क करके बकाया धनराशि वसूलने का आदेश दिया है। मामले में सुनवाई की अगली तारीख नौ जून तय की गई है।