अयोध्या। सरकार की ओर से गठित श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र (ट्रस्ट) में भक्तों से जुटाई गईं संपत्तियां फ्रीज होनी शुरू हो गई हैं। मंदिर बनाने के लिए चार दावेदारों में सबसे प्रमुख श्रीरामजन्मभूमि न्यास की ओर से तीस साल से करोड़ों भक्तों के दान से जुटाई गईं शिलाएं, निर्माण सामग्री समेत समस्त कार्यशालाओं की मशीनें व चल-अचल संपत्तियां अब सरकार की ओर से गठित नए ट्रस्ट में समाहित हो गई हैं।
यह कार्रवाई न्यास अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास व प्रबंधक चंपत राय के अनुरोध पर की गई है। इसके पहले गृह मंत्रालय ने वित्त विभाग के अधिकारियों के साथ टीम बनाकर न्यास की संपत्तियों व ऑडिट रिपोर्ट का भौतिक सत्यापन करके नए ट्रस्ट के साथ अटैच करने का प्रस्ताव किया था।
सुप्रीम कोर्ट से 9 नवंबर 2019 को रामजन्मस्थान के पक्ष में दिए गए फैसले में सरकार को राममंदिर के लिए अयोध्या एक्ट के तहत ट्रस्ट बनाने व दिशा-निर्देश तय करने का आदेश था। सूत्र बताते हैं कि गृह मंत्रालय में राममंदिर बनाने का दावा करते हुए चार ट्रस्टों ने अधिकार मांगा था।
इसमें श्रीरामजन्मभूमि न्यास, रामालय, श्रीरामजन्मभूमि निर्माण न्यास व महाबीर मंदिर ट्रस्ट शामिल था। सरकार ने सभी के दावों का परीक्षण कराने के लिए गृह मंत्रालय व वित्त विभाग की टीम बनाई। मौके पर सर्वे हुए तो 1985 में गठित श्रीरामजन्मभूमि न्यास की तैयारी पुख्ता पाई गई। 1989 से अबतक की आडिट रिपोर्ट का मौके पर गोपनीय ढंग से सत्यापन, फोटोग्राफ्स व वीडियोग्राफी हुई।
सूत्र बताते हैं कि नए ट्रस्ट में महंत नृत्यगोपाल दास को अध्यक्ष और चंपत राय को महासचिव बनाने के पीछे भी उनके ट्रस्ट की इमानदारी से की गई राममंदिर की तैयारी का अहम रोल था। उनके आवेदन पर नए ट्रस्ट में सारी संपत्तियां समाहित हो गई हैं।
बाकी ट्रस्टों की ओर से राममंदिर के लिए कोई खास योजना या तैयारी ग्राउंड स्तर पर नहीं पाई गई। नए ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय कहते हैं कि सितंबर 1990 में विहिप ने अयोध्या में अपनी तीन कार्यशालाएं कार्यशालाएं शुरू की।
साथ ही राजस्थान के बयाना, भरतपुर से बंशी पहाड़पुर पत्थरों का चयन करके पत्थरों को तराशने के लिए पिंडवाड़ा को चुना गया। काम जल्द पूरा हो, इसके लिए अशोक सिंघल के साथ जनवरी 1995 में पूजन कर यहां तीन कार्यशालाओं में कार्य शुरू करवाया गया था।
1985 में श्रीरामजन्मभूमि न्यास बना, लेकिन धन संग्रह 1989 से शुरू हुआ। हम किसी और को हिसाब क्यों दें, तीस साल की आडिट रिपोर्ट में पाई-पाई का हिसाब सरकार को देते रहे हैं। आयकर रिटर्न भरने में कभी देर नहीं की, कभी एक रुपये का दंड नहीं लगा। जिस निमित्त तैयारी थी, शत-प्रतिशत उसी मॉडल पर काम समर्पित ढंग से आगे बढ़ रहा है।
सवा रुपये दे दे रे भैया राम शिला के नाम का, राम के घर में लग जाएगा पत्थर तेरे नाम का। अस्सी के दशक के अंतिम सालों में विश्व हिंदू परिषद के अशोक सिंहल समेत संत-धर्माचार्यों के अगुवाई में राममंदिर आंदोलन जब चरम पर था तो इसी गीत से चंदा लेने का अभियान घर-घर पहुंच रहा था। कहा जा रहा था कि जब अयोध्या में राममंदिर बनेगा तो यह शिलाएं लगेगी और दान का पैसा काम आएगा।
रामालय ट्रस्ट के सचिव स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद कहते हैं कि श्रीरामजन्मभूमि/बाबरी मस्जिद मुकदमे के दौरान हमारे ट्रस्ट ने किसी से कोई चंदा-दान नहीं लिया। फैसले के बाद स्वर्ण संग्रह अभियान चलाया गया है।
सनातन धर्म में सोना की चोरी सबसे बड़ा पाप कर्म है, क्या हम चोरी करेंगे? रामालय की ओर से राममंदिर के लिए जुटाए गए दान का पाई-पाई अधिकृत ट्रस्ट को सुपुर्द की जाएगी। बहुत से लोग हैं हमारे माध्यम से ही दान देना चाहते हैं, हम उनसे लिए गए हर दान को राममंदिर निर्माण के लिए अपने तरीके से देंगे।
पूर्व आईपीएस कुणाल किशोर कहते हैं कि हमने या महाबीर मंदिर ट्रस्ट की ओर से कोई दावा मंदिर बनाने या ट्रस्ट में रखे जाने को लेकर कभी नहीं किया। विहिप के संरक्षक दिनेश चंद दी ने यह बात कही थी, तब उनसे पूछा था तो, बोले कि गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया था। लेकिन मैं इसका खंडन करता हूं।
राममंदिर के लिए 10 करोड़ रुपये हमारा ट्रस्ट देगा, दो करोड़ का चेक तैयार है। हमने एक ट्रस्ट से दूसरे ट्रस्ट को दान देने के नियमों को जांचा है, अब नया नियम है कि उसी सत्र के धन का ही दान हो सकता है, इस हिसाब से भी दो करोड़ दे सकते हैं। लेकिन, पुराना नियम 10 करोड़ देने से नहीं रोकता है।