फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विकास की चाह के साथ छले जाने का उठा दर्द

Tue, 17 Jan 2017 11:03 PM IST
फैजाबाद
विज्ञापन
फैजाबाद के गुलाबबाड़ी में मंगलवार को अमर उजाला के सियासी अड् डे में मौजूद प्रबुद्धजन। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
शहर का गुलाबबाड़ी, जहां गुलाब की महक भले ही न मिले, मगर सियासी चर्चाएं अब सुबह की चहलकदमी में तेज होती सांसों के साथ गर्मी में तब्दील हो जाती हैं। आखिर विधानसभा चुनाव की रणभेरी जो बज चुकी है...। लोगों में आने वाली सरकार से तरक्की-रोजगार व सेवाओं में बेहतरी की आस है तो अब तक छले जाने का दर्द भी। अब यहां किसी भी दल का नेता हो या समर्थक, उसे अपनी कुछ सुनाने से पहले काफी कुछ सुननी पड़ रही है। टहलने आए लोग दूर जाने के बजाय गुलाबबाड़ी के बहाने ही नेताओं समेत पूरे सिस्टम को घेरते दिखे।  
विज्ञापन


अमर उजाला ने गुलाबबाड़ी में अपने सियासी अड्डा कार्यक्रम के जरिए मंगलवार को शहरियों, वरिष्ठ नागरिकों, नौकरीपेशा, कारोबारी व युवाओं का मन टटोला। किसी ने सवाल उठाया कि सूबे ने वृक्षारोपण में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड बनाया और जिले में भी पांच लाख पेड़ लगे मगर गुलाबबाड़ी का क्या हुआ? जवाब आया कि सच सामने है कोई पेड़ न बीते साल लगा, न पिछले कई सालों में..।

बात आगे बढ़ी तो तमाम लोग बोल पड़े कि सिर्फ कागज में विकास और योजनाओं का मायाजाल परोसा जा रहा है। अयोध्या-फैजाबाद में पयर्टन से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी, सीवर सब बदहाल हैं। बुर्जुर्गों का दर्द छलका कि जिले के अस्पतालों में डॉक्टर नहीं हैं, छोटी-छोटी बीमारी में लखनऊ जाने पर ही राहत मिलती है। आखिर करोड़ों-अरबों कहां खर्च हो रहे? राजनेता अब छलने में माहिर हो गए हैं, ऐसे में वोट देने से पहले खूब सोच-विचार करना जरूरी होगा। 
विज्ञापन


युवाओं का दर्द इस बात को लेकर छलका कि यहां पर पढ़ने-लिखने के बाद नौकरी के लिए महानगरों की ओर मजबूरी में जाना पड़ता है। यदि यहीं पर रोजगार के बेहतर संभावनाएं बन जातीं तो घर छोड़ बाहर नहीं जाना पड़ता। गुणवत्तापरक साखदार शैक्षिक संस्थान न होने से हो रही समस्याएं भी उठीं।

इंटर पास आउट होने के बाद उच्च शिक्षा के लिए काफी तादाद में युवाओं को दिल्ली, मुंबई जाना पड़ता है। यदि यहीं पर उस श्रेणी के साखदार इंजीनियरिंग और प्रबंधन के संस्थान खुल जाते तो बाहर जाने से होने वाले खर्चे में कमी आ जाती। 

महाविद्यालयों के शिक्षकों का कहना था कि कहने को जिले में जगह-जगह कॉलेज खुल गए हैं। वहां पर चमकदार बिल्डिंग हैं पर जब अच्छी फैकल्टी ही नहीं है तो वहां के छात्रों की शिक्षा कैसे बेहतर होगी। बुजुर्गों को मलाल है कि उनकी समस्याओं को हर स्तर पर इग्नोर की जा रही है। एक बुजुर्ग ने बताया कि इसी गुलाबबाड़ी का ट्रैक इतना खराब है कि दो-चार वृद्ध हर रोज गिरते हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें