पिछले एक सप्ताह से अक्षय तृतीया पर शो रूमों को सजाने-संवारने के साथ नये सामान रखकर इंतजार कर रहे सराफा कारोबारियों को ग्राहकों ने जोर का झटका दिया। सुबह से ही दुकानें खोलकर बैठे मालिक शाम तक ग्राहकों के आने का इंतजार करते रहे।
ग्राहक महंगाई के चलते नाक की कील और पैर का बिछुआ खरीदने तक सीमित रह गये। कारोबारियों ने जिले में दो करोड़ से अधिक के आभूषणों की बिक्री का अनुमान लगाया है। साकेत सराफा मंडल, फैजाबाद के महामंत्री और कारोबारी नरेश अग्रवाल कहते हैं, बाजार में कोई चमक नहीं है।
जो कुछ ग्राहक आये भी वह अक्षय तृतीया पर औपचारिकता निभाते रहे। ऐसे ग्राहक नाक की कील और पैर का बिछुआ जैसे छोटे-छोटे आइटम खरीदते रहे। छोटे कारोबारियों का हाल सबसे अधिक खराब रहा। दुकानों पर सन्नाटा पसरा रहा तो कई दुकानों में लोग ऊंघते रहे।
कहा, सच तो यह है कि कस्टमर दुकानों पर पहुंचे ही नहीं। बोले, नगर में करीब एक करोड़ तो समूचे जिले में दो करोड़ से कुछ अधिक मूल्य के जेवरों की बिक्री हुई है। नगर के प्रतिष्ठित व स्वर्णाभूषणों के बड़े कारोबारी आलोक बंसल बताते हैं, पिछले साल की तुलना में बहुत कम बिक्री हुई है। इसकी वजह सोने-चांदी का भाव बढ़ना है।
बीते साल की अक्षय तृतीया पर सोने का भाव साढे़ चौबीस हजार रुपये प्रति दस ग्राम था। आज यह भाव तीस हजार के पार है। कहा, लोगों का पर्व के प्रति रुझान कम दिखा, जिससे दुकान मालिकों की भी उम्मीदें धरी रह गयीं।
प्रभात टाकीज के पास छोटी दुकान खोलकर स्वर्णाभूषण बेचने बैठे गणेश सोनी कहते हैं, अक्षय तृतीया पर ग्राहकों का टोटा बना रहा। कोई खास बिक्री नहीं हुई। कील, बिछुआ जैसे छोटे सामान बेचकर तीन-चार हजार की बिक्री तो रोज की बात है। उनके लिए पर्व भी आम दिनों की तरह गुजरा। चौक में चार-चार कदम पर दुकानें खुली रहीं, लेकिन सभी ग्राहकों से सूनी रहीं।