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रामलला के प्राकट्योत्सव पर निकली शोभायात्रा

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अयोध्या। श्रीरामजन्मभूमि सेवा समिति के तत्वाधान में आयोजित रामलला के प्राकट्योत्सव का रविवार को रामकोट की परिक्रमा और शोभायात्रा के साथ समापन हो गया। नौ दिवसीय प्राकट्योत्सव में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों की धूम रही। इस वर्ष राममंदिर के हक में फैसला आने के बाद उत्सव को समिति द्वारा भव्य रूप में मनाने की तैयारी की गई थी। इससे पूर्व पूजित कलश को रामजन्मभूमि अधिग्रहीत परिसर से वापस लाकर क्षीरेश्वरनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की गई। यहां से हनुमानगढ़ी के निशान व भगवान के स्वरूपों के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई। भगवान के स्वरूपों की झांकी भक्तों के श्रद्धाकर्षण का केंद्र बनी। शोभायात्रा में वैदिक छात्र व रामनगरी के संत-धर्माचार्यों सहित बड़ी संख्या में भक्त शामिल रहे।
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नौ दिवसीय उत्सव की शुरूआत विगत 21 दिसंबर को कलश पूजन के साथ हुई थी। 27 दिसंबर को समिति पदाधिकारियों ने पूजित कलश रामजन्मभूमि के पुजारी को सौंपा था। रविवार को पूजित कलश वापस लाकर क्षीरेश्वरनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की गई। यहां हनुमानगढ़ी के निशान की विधिवत पूजा के बाद रथ पर सवार भगवान श्रीराम, हनुमान, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, गणेश जी के स्वरूपों की आरती उतारी गई। इसके बाद बैंडबाजे के साथ भव्य शोभायात्रा निकली तो दर्शन करने के लिए भक्त उमड़ पड़े।
शोभायात्रा टेढ़ीबाजार, कटरा, अशर्फी भवन, सब्जीमंडी, शृंगारहाट, हनुमानगढ़ी होते हुए क्षीरेश्वरनाथ मंदिर पर वापस आकर समाप्त हुई। इस दौरान जगह-जगह शोभायात्रा का स्वागत किया गया। समिति महामंत्री रामप्रसाद मिश्र ने बताया कि समिति 1950 से रामलला का प्राकट्योत्सव मना रही है। 1992 में विवादित ढांचा ढहाए जाने की घटना के बाद से अधिग्रहीत क्षेत्र के समीप स्थित क्षीरेश्वरनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ प्राकट्योत्सव मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि अब रामलला के पक्ष में निर्णय आ गया है, ऐसे में रामलला के प्राकट्योत्सव का उल्लास भी दोगुना हो गया है।
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उन्होंने राममंदिर के लिए नया ट्रस्ट बनाने के बजाय राममंदिर निर्माण का अधिकार रामजन्मभूमि सेवा समिति को ही सौंपने की मांग की। कहा कि इसके लिए वह कोर्ट में याचिका भी दायर कर चुके हैं। शोभायात्रा में पार्षद रमेश दास, राजू दास, भाजपा अयोध्या मंडल अध्यक्ष बालकृष्ण वैश्य, संजय शुक्ल, रामभद्र पाठक, आदित्य शुक्ल, पराग मिश्र, हरिशंकर सिंह आदि शामिल रहे।
शोभायात्रा में शामिल निर्वाणी अनी अखाड़ा के श्रीमहंत धर्मदास ने कहा कि रामलला का प्राकट्य उत्सव का उल्लास इस बार दोगुना है क्योंकि लंबे समय से विवाद में उलझे अयोध्या मामले का समाधान हो चुका है। रामलला के हक में निर्णय आने के बाद सभी को भव्य दिव्य राममंदिर निर्माण का इंतजार है। अयोध्या में ऐसा मंदिर बनना चाहिए जो अतुलनीय व गगनचुंबी हो। हमें उम्मीद है कि अयोध्या की गरिमा के अनुरूप ही भव्य राममंदिर का निर्माण होगा।
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