बीकापुर। मैं जिंदा हूं साहब..। ये रट लगाए दलित किसान भदई रविवार को एसडीएम से मिला। उन्हें बताया कि लेखपाल ने राजस्व दस्तावेजों में उसे मृत दर्शाकर गांव के ही तीन लोगों को उसकी पूरी प्रापर्टी की फर्जी वरासत कर दी है। इसकी शिकायत पर बीते तहसील दिवस में डीएम ने जांच के आदेश दिए, तो लेखपाल ने तीन हजार रुपये घूस की मांग की है। पाई-पाई को मोहताज किसान ने एसडीएम से लेखपाल की शिकायत की, तो वे दंग रह गए। एसडीएम ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है, लेखपाल के दोषी मिलने पर बर्खास्तगी तक की कार्रवाई हो सकती है।
ये मामला बीकापुर तहसील के भावापुर गजेड़ी गांव का है। दलित किसान भदई अधिकारियों की चौखट पर जिंदा होने का सर्टिफिकेट मांगता फिर रहा है। बीकापुर तहसील के लेखपाल ने इस दृष्टिहीन किसान को मृत दिखाकर गांव के तीन लोगों के नाम उसकी जमीन की वरासत कर दी है। इसका खुलासा उस वक्त हुआ जब किसान को नि:शुल्क बोरिंग के लिए खतौनी की आवश्यकता हुई। उसने कंप्यूटरीकृत खतौनी निकलवाई तो तीन लोगों के नाम उसकी जमीन की वरासत होने का पता चला।
मामले की शिकायत बीते तहसील दिवस पर डीएम से की गई थी। जिस पर डीएम अनिल ढींगरा ने एसडीएम को जांच करा कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद भी भदई को अभिलेखों में जिंदा करने के लिए लेखपाल ने तीन हजार रुपये घूस मांगी है। एसडीएम को पीड़ित किसान ने पूरी व्यथा सुनाई। बताया कि अभिलेखों में उसे जिंदा करने के लिए लेखपाल हरिप्रसाद शुक्ल तीन हजार रुपये घूस मांग रहा है। एसडीएम अमित कुमार सिंह ने बताया कि मामले की शिकायत मिली है। जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट में लेखपाल के दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।