अयोध्या। अयोध्या तीर्थ विवेचनी समिति के संयोजन में संत-धर्माचार्यों ने गुरुवार को प्रशासन व पुलिस अफसरों के साथ तुलसी स्मारक भवन के प्रेक्षागृह में बैठक की। इसमें संतों ने अयोध्या के ऐतिहासिक व पौराणिक अस्तित्व के साथ भूमाफिया द्वारा किए जा रहे खिलवाड़ का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। बैठक के माध्यम से पांच प्रस्तावों को पास करते हुए राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एडीएम सिटी को सौंपा।
अध्यक्षता करते हुए श्रीमणिराम दास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास शास्त्री ने कहा कि अयोध्या का जो स्वरूप होना चाहिए, वह नहीं है। नगरी का धार्मिक, पौराणिक व सांस्कृतिक स्वरूप को तेजी से बदलने का कार्य किया जा रहा है। संतों ने कहा कि वर्ष 1902 में एसडब्ल्यू होम्स के प्रयास से 148 शिलालेख लगाए गए थे। यह शिलालेख अयोध्या के 84 कोस में लगे हैं। इनमें कुल 59 कुंडों पर शिलालेख लगे हैं, जिसमें 27 कुंड केवल अयोध्या में ही है। कहा कि आधे से ज्यादा कुंडों का अस्तित्व समाप्त हो चुका है। कई कुंडों में नाले को मिला दिया गया है। संतों ने बैठक में पांच प्रस्ताव पास हुए। इनमें अयोध्या के समस्त पौराणिक कुंडों का जीर्णोद्धार व पुनर्विकास कराने, अयोध्या तीर्थों की सांस्कृतिक सीमा में किसी भी प्रकार के जीव आखेट, मत्स्य आखेट, मास-मंदिरा एवं मादक द्रव्यों की बिक्री पर प्रतिबंधों का अनुपालन कराने, तीर्थ क्षेत्र के समस्त कुंडों, प्राचीन कूपों एवं पार्कों के सौंदर्यीकरण कराने, सरयू नदी में गिरने वाले गंदे नालों का बंद एवं नालों पर सीवेज ट्रीटमेंट लगाकर शोधन कराने और संपूर्ण स्वच्छता के लिए जागरूकता का अभियान चलाने आदि का मुद्दा रखा।
एडीएम सिटी डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया ने कहा कि संविधान में अयोध्या के विकास के लिए सारे वित्तीय अधिकार नगरपालिका को प्राप्त है। सफाई कर्मचारियों के वेतन के लिए संपूर्ण धन अवमुक्त हो चुका है। नाले का प्रस्ताव जो भेजा जाएगा, उसे पूर्ण किया जाएगा। कोई भी नाली कच्ची नहीं बचेगी। कहा कि नौ करोड़ की लागत से अयोध्या की 99 सड़कें को बनाने का प्रस्ताव हो चुका है। पैसा अवमुक्त हो चुका है। संतों को सुझाव दिया कि अपने मंदिर के सामने सौ मीटर क्षेत्र की स्वत: सफाई कराएं। एसपी सिटी आरएस गौतम ने कहा कि रामनगरी में किसी भी प्रकार के अवैधानिक कृत्य नहीं होने दिए जाएंगे। बैठक में समिति के अध्यक्ष राजकुमार दास, रामनयन मिश्र, महंत गिरीश पति त्रिपाठी, महंत मनमोहन दास, अभिषेक मिश्र, पुजारी रामदास, अशोक टाटंबरी, डा. सत्येंद्र त्रिपाठी, महंत अर्जुन दास, महंत राम मंगल दास, महंत राम शरण दास, महंत रामदेव दास शास्त्री, वीरेंद्र शर्मा, महंत मैथिली रमण शरण आदि मौजूद रहे।