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बदले रूप में घूमते मिले तपस्वी छावनी के महंत

Wed, 09 Oct 2013 05:38 AM IST
Faizabad
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अयोध्या। रामघाट स्थित प्रसिद्ध तपस्वी जी की छावनी के लापता महंत सर्वेश्वर दास 16 माह बाद मंगलवार को अचानक शहर में घूमते मिले। बदले रूप में उन्हें मंदिर के महंत हरिबंश दास उर्फ औलिया बाबा उन्हें पहचान कर मंदिर ले आए। उनके अचानक लापता होने और मंदिर की संपत्तियों को बेचने व बरबाद करने के आरोपों पर से भी पर्दा हट गया है। महंत सर्वेश्वर दास ने प्रेसवार्ता के दौरान बताया कि गुरु महाराज स्वामी रामगुलाम दास के उत्तराधिकारी के रूप में 28 सितंबर 1998 को महंत बनाया था। तभी से वह मंदिर के संरक्षक के रूप में पूरी ईमानदारी से कार्य करते रहे। मंदिर की कुछ जमीनें जो कब्जे में और विवादित थीं। उन जमीनों प्रमोद वन में दस बिस्वा, सुल्तानपुर में 16 बीघा, गोंडा के कोइली जंगल में 47 बीघा को उन्होंने औने-पौने दामों में बेचने का कार्य किया। इन जमीनों की बिक्री से मिले धन को बैंक में जमा करा दिया था। इसको लेकर मंदिर में गुरु भाइयों महंत रघुनाथ दास, रामदास आदि ने उन पर इस्तीफे का दबाव बनाने के साथ अपमानित करने लगे। यहां तक की उन्हें मारने-पीटने की धमकी भी दी जाने लगी। यह सब गुुरु भाई औलिया बाबा के सामने होता रहा लेकिन वह कुछ नहीं बोले। इन घटनाओं से मन टूटा और अपमानित महसूस किए जाने के कारण वह 9/10 जून को चुपचाप मंदिर को छोड़ ऋषिकेश चले गए। सिर पर जटा को बनवा कर कंठी को गंगा जी में प्रवाहित कर दिया और सन्यासी संतों के खेमे में पहुंच परिचय छिपाने के लिए अपना नया नाम मनीषानंद रख लिया। बताया कि वह अयोध्या बैंक में काम से आए थे और औलिया बाबा ने उन्हें पहचान पकड़ लिया लेकिन वह अब मंदिर में नहीं रहना चाहते। दूसरी तरफ महंत हरिवंश दास उर्फ औलिया बाबा ने कहा कि महंत सर्वेश्वर दास के लापता होने के बाद 28 जून को मंदिर व हजारों संतों की व्यवस्था की समस्या को देखते हुए उन्हें महंत बनाया गया था। यह भी निर्णय लिया गया था कि वह वापस आते हैं तो उनका स्वागत किया जाएगा।
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