फैजाबाद। 33 वर्ष पहले बनाए गए फर्जी जाति प्रमाणपत्र व उसकी बैसाखी के सहारे सरकारी नौकरी हथियाने वालों के गर्दन पर तलवार लटक रही है। इसी में एमएलएमएल विद्यामंदिर में कार्यरत शिक्षक दल सिंगार भी हैं। यह मामला शायद सतह पर भी न आता यदि दल सिंगार ने प्रधानाचार्य पर हमला न किया होता। हुआ यूं कि तत्कालीन फैजाबाद जिले की टांडा तहसील के तकरीबन 60 लोगों ने अपनी वास्तविक स्थिति को छिपाकर अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र हासिल कर लिया। बगैर अर्हता के प्रमाणपत्र हासिल करने वालों ने सरकारी नौकरियां भी प्राप्त कर राजकोष को भारी क्षति पहुंचाई। मामले की शिकायत पर हुई जांच में ये सभी प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए, जिसके कारण इन्हें निरस्त कर दिया गया। बावजूद इसके जारी प्रमाणपत्रों का प्रयोग होता रहा। ऐसा ही एक मामला शहर के मुन्नालाल मदनलाल विद्या मंदिर रिकाबगंज में उजागर हुआ है। इससे फर्जी तरीके से एससी प्रमाणपत्र का फायदा उठाने वाले अन्य सरकारी सेवक सकते में है। अंबेडकरनगर जिले की टांडा तहसील के दस्तावेज बताते है कि 33 साल पहले तहसील प्रशासन की ओर से चूक हुई थी। उस चूक को तो आठ वर्ष बाद तहसील स्तर से ही सुधार दिया गया लेकिन वहां से जारी हुए गोंड जाति के प्रमाणपत्र का प्रयोग बेरोकटोक जारी रहा। जिन लोगों ने इसे हासिल कर लिया था, उनके ऊपर प्रमाणपत्र के निरस्तीकरण आदेश का कोई असर नहीं पड़ा। इसका नतीजा रहा कि अंबेडकरनगर, फैजाबाद सहित प्रदेश के अन्य जनपदों में इस फर्जी अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र का सहारा ले अनेक लोग नौकरी कर रहे हैं। जहां तक फैजाबाद जिले की बात है, यहां के तीन-चार विद्यालयों में ऐसे लोगों के खिलाफ शिकायत पर जांच हुई तथा प्रबंधक के स्तर से ही सेवा समाप्त कर दी गई। शहर के अयोध्या मार्ग पर एक प्रतिष्ठित इंटर कॉलेज में तकरीबन एक दशक पहले एक शिक्षक की सेवा समाप्त की गई थी। विश्वस्त सूत्र तो यह भी बताते हैं कि जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में तीन व डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय में दो लोग कार्यरत है। नौकरी हासिल करने वालों का सिलसिला यहीं नहीं थमा। डिप्टी रजिस्ट्रार चिट्स एवं सोसाइटी व अन्य सरकारी कार्यालयों में गोंड सार्टीफिकेट वाले कुछ व्यक्ति कार्यरत है।