फैजाबाद। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलसचिव व पूर्णकालिक परीक्षा नियंत्रक रहे अखिलेश चंद्र ने कुलपति के निर्णय के खिलाफ शासन में दस्तक दी है। पता चला है कि उन्होंने परीक्षा नियंत्रक पद से हटाए जाने के कुलपति के फैसले के विरुद्ध आला अधिकारियों को अपना प्रत्यावेदन सौंपा है। इसकी पुष्टि प्रभारी कुलसचिव अखिलेश चंद्र ने भी की, लेकिन इसके अतिरिक्त कुछ बोलने से मना कर दिया। 12 सितंबर को विवि के कुलपति प्रो. पीसी त्रिवेदी ने आदेश जारी कर पूर्णकालिक परीक्षा नियंत्रक व प्रभारी कुलसचिव अखिलेश चंद्र को उनके पद से हटा दिया था। परीक्षा नियंत्रक का चार्ज उन्होंने एमबीए विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक शुक्ल को सौंपा है। हालांकि कुलसचिव का अतिरिक्त प्रभार अखिलेश चंद्र के पास ही है। कुलपति का यह फैसला प्रभारी कुलसचिव को काफी नागवार गुजरा था, इसीलिए वह डॉ. अशोक शुक्ल को चार्ज न देकर लखनऊ रवाना हो गए थे और अपना प्रत्यावेदन आला अधिकारियों को सौंप दिया। हालांकि चार्र्ज न देने के बावजूद परीक्षा नियंत्रक पद का कार्यभार डॉ. अशोक ही संभाल रहे हैं। सूत्रों के अनुसार उनकी ओर से दिए गए प्रत्यावेदन में अदालत से स्टे होने के बाद भी कुलपति द्वारा हटाने और स्टे अभी वैकेंट न होने आदि की जानकारी दी गई है। दरअसल, वर्ष 2007 में शासन ने तत्समय परीक्षा नियंत्रक रहे अखिलेश चंद्र को जांच में दोषी मिलने पर निलंबित कर दिया था। इस निर्णय के खिलाफ उन्होंने अदालत की शरण लेकर स्थगनादेश हासिल कर लिया था। तब से यह स्टे आर्डर पूर्ववत् अभी तक प्रभावी है। इसे किसी पक्ष ने वैकेंट भी नहीं कराया है। स्टे होने के बावजूद कुलपति के पद से हटाने पर ही प्रभारी कुलसचिव नाराज हुए थे। तब उन्होंने भी यह कहा था कि उनकी नियुक्ति शासन से परीक्षा नियंत्रक पद पर हुई है, न कि कुलसचिव पद पर। वैसे भी स्टे होने की वजह से उन्हें हटाया नहीं जा सकता। बताया जा रहा कि इस बात को भी उन्होंने अधिकारियों के सामने रखा है। प्रभारी कुलसचिव अखिलेश चंद्र ने प्रत्यावेदन सौंपे जाने को तो स्वीकारा, लेकिन इस पर और कुछ बात करने से इन्कार कर दिया। उधर उनके करीबियों की मानें तो शासन से राहत न मिलने पर वह अदालत का दरवाजा भी खटखटा सकते हैं।