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त्रिनिदाद के फैजाबाद में भी दिखती अवध की झलक

Fri, 25 Jan 2013 05:30 AM IST
Faizabad
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अयोध्या। अवध से सांस्कृतिक संबंधों की मजबूती के लिए गुरुवार को त्रिनिदाद के हाई कमिश्नर चंद्रदत्त सिंह अयोध्या में थे। उन्होंने यहां तुलसी स्मारक भवन में विभिन्न कलाकृतियों को देखा, रामलला का दर्शन पूजन किया। कहा कि यूपी के फैजाबाद और त्रिनिदाद के फैजाबाद के बीच सिस्टर सिटी के संबंध हैं। वहां भी अवध की झलक दिखती है। इस सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने केंद्रीय संस्कृति मंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से भी बातचीत की है। ऐसा उनका कहना था।
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अपने तीन दिवसीय प्रवास पर निकले श्री सिंह ने तुलसी स्मारक भवन में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि दोनों देशों में स्थित ‘फैजाबाद’ सांस्कृतिक नजरिए से कमोबेश एक जैसे हैं। बस सिर्फ अंतर इतना है कि त्रिनिदाद में फैजाबाद (एफवाईजेबीएडी) है। दोनों देशों के बीच भौगोलिक दूरियों के बावजूद सांस्कृतिक एकरूपता की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि वैसे तो हिंदी बोलने व समझने वाले कम हैं लेकिन जगजीत सिंह व गुलाम अली की गजल और मो. रफी व लता मंगेशकर के गीत लोगों के कंठ में वास करते हैं। पुराने रिश्तों को याद कर वह बेहद भावुक हो गए। कहा कि यहां से तो 176 वर्ष पूर्व हमारे पूर्वज त्रिनिदाद जाते वक्त सिर्फ तीन चीजेें ले गए थे ‘रामायण, आम व गंगाजल’ लेकिन आज भारत की संस्कृति वहां घर आंगन को समृद्ध कर रही है। कहा कि यूपी की कजरी व अन्य लोकगीत वहां पहुंच कर ‘चटनी म्यूजिक’ के रूप में लोकप्रिय है। कहा कि त्रिनिदाद सरकार ने पांच एकड़ में कल्चरल सेंटर विकसित किया है, जिसमें रामलीला का मंचन होता है। इसमें कैरेबियन म्यूजिक की प्रधानता रहती है। उन्होंने बताया कि 1973 में दिल्ली में छात्र जीवन के दौरान चंद्रदत्त सिंह व अनीता प्रकाश की मुलाकात हुई और दोनों विवाह के स्नेहिल डोर में बंध गए। अनीता प्रकाश ने कहा कि वह मूलत: लखनऊ की रहने वाली हैं। उनके पिता सत्य प्रकाश सेना में अफसर रहे है। उधर संस्कृति विभाग के अफसर वाईपी सिंह बताते हैं कि त्रिनिदाद व भारत के बीच जेनेटिक टूरिज्म (आनुवांशिक संबंध) पर काम हो रहा है। हाई कमिश्नर चाहते हैं कि दोनों देशों के बीच शिक्षा, संगीत, संस्कृति के आदान-प्रदान हो। हस्तशिल्प प्रशिक्षण केंद्र भी त्रिनिदाद में खुलवाना चाहते हैं। दोनों देशों के फैजाबाद के बीच संबंध मजबूत करने की योजना बनाई जा रही है।
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