फैजाबाद। स्थान- कचेहरी परिसर।
मौका-पांच वर्ष पहले आज ही की तारीख
तेज धमाके के साथ ही भगदड़ व चीत्कार, हर तरफ कुछ देर के लिए सिर्फ धुआं ही धुआं। शेड नंबर चार में बैठे अधिवक्ता राधिका प्रसाद मिश्रा सहित स्टाम्प वेंडर व वादकारी के प्राण पखेरू उड़ गए। 23 नवंबर 2007 का यह भयावह दृश्य था, जब आतंकियों ने कचेहरी में बम विस्फोट किया था। इस मामले में 39 लोगों की गवाही हो चुकी है तथा 40 वें गवाह को कोर्ट ने तलब किया है। शासन ने मुकदमा वापस लेने के संबंध में जिलाधिकारी से राय मांगी थी लेकिन डीएम ने मुकदमा न उठाने की सलाह शासन को भेज दी है जिसमें कहा है कि ऐसा होने पर जनमानस पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। कचेहरी सीरियल ब्लास्ट की पांचवी बरसी पर वकीलों की आंखों में वह मंजर तैर उठा। अधिवक्ताओं ने यादें साझा कीं तथा मजबूत संकल्प से कहा कि ऐसी वारदात से देश का मनोबल नहीं गिर सकता।
अधिवक्ता राजीव कुमार शुक्ला की आंखें साथी अधिवक्ता राधिका प्रसाद मिश्रा, स्टाम्प वेंडर व वादकारी की मौत का वाकया याद करते सजल हो उठती हैं। वकील विनोद उपाध्याय ने कहा कि जिस भय को आतंकवादी हमारे दिलों में बैठाना चाहते हैं, हम उससे भयभीत नहीं होंगे। उनकी ओर से दी जा रही चुनौतियों का डटकर मुकाबला करते हुए उसी निडरता से हम अपनी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े रहेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि घटना की जितनी भी निंदा की जाए कम है। वकील धनुषजी ने कहा कि उस घटना की चर्चा होते ही पूरा दृश्य आंखों के सामने घूमने लगता है। चारों ओर चीख व पुकार सुनाई पड़ रही थी। लोग इधर-उधर भयवश भाग रहे थे लेकिन कुछ ही देर बाद जैसे पता चला कि आतंकियों ने कचेहरी में सिलसिलेवार विस्फोट किया है, लोग सीना तानकर खड़े हो गए। अधिवक्ता श्रीधर मिश्रा कहते हैं कि सीरियल ब्लास्ट के पांच वर्ष बीत जाने के बाद भी सुरक्षा के पर्याप्त प्रबंध नहीं हैं। हमें एकजुट होकर आतंकवाद का सामना करना चाहिए।