अयोध्या। रामनगरी में रविवार को सांप्रदायिक सद्भाव की नजीर दिखाई दी। अयोध्या के रामकथा पार्क में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के संयोजन में जलसा-ए-पैगामे मोहब्बत सम्मेलन का आयोजन हुआ। इसमें हिन्दू-मुस्लिम सहित अन्य धर्मों के लोग एक साथ मंच पर नजर आए।
आरएसएस प्रचारक इन्द्रेश ने कहा कि जो बाबरी मस्जिद को स्वीकार करते हैं, समझो वह इस्लाम नहीं मानते। उन्होंने कहा कि इस्लाम में लिखा है कि आक्रांता के नाम पर पूजा या इबादतगाह नहीं हो सकती, अब फैसला आप को करना है। सम्मेलन के संयोजक महरिध्वज ने कहा कि हम पहले आदम हैं इसलिए हमें फक्र है।
कोई भी इंसान बिना नवी का नहीं, इसे मानने की जरूरत है। मौलाना कमालुद्दीन लखनऊ ने कहा कि पैगंबर ने मोहब्बत का पैगाम दिया है। जिंदा रहने का हक उसी को है जो मोहब्बत का पैगाम बांटे। सम्मेलन में संस्कृति मंत्री लक्ष्मीनारायण चौधरी, नगर विधायक वेदप्रकाश गुप्ता, अभिषेक मिश्र, अभय सिंह, आदि मौजूद रहे।
पाकिस्तान की राजनीति से दूर रहें मुस्लिम
शिया वक्फ बोर्ड के प्रदेश अध्यक्ष वसीम रिजवी ने कहा कि हिंदुस्तान में मोहब्बत का पैगाम देना है तो पाकिस्तान की राजनीति से मुस्लिमों को किनारा कसना होगा।
उन्होंने बताया कि शिया वक्फ बोर्ड ने अपना प्रस्ताव पक्षकारों के समक्ष रखा है। सभी का समर्थन मिल रहा है। कहा कि पांच दिसंबर से रामजन्मभूमि मसले में सुनवाई शुरू हो रही है, इससे पूर्व सभी पक्षकारों के साथ बैठक कर प्रस्ताव सौंपूंगा।