यदि फोरलेन बना तो चार जिलों से होकर गए लगभग 275 किमी इस मार्ग से जुड़े सैकड़ों गांवों की सूरत बदल जाएगी। साथ ही अयोध्या की सांस्कृतिक सीमा में स्थित पौराणिक स्थलों, सरयू घाटों समेत संत-मुनियों के आश्रमों समेत भगवान राम से जुड़े कई धार्मिक स्थलों तक देश-विदेश के पर्यटकों की पहुंच आसान हो जाएगी।
सांसद लल्लू सिंह ने बताया कि केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से मिलकर लगभग 275 किमी. लंबे चौरासी कोसी परिक्रमा पथ को फोरलेन मार्ग बनाने की मांग की थी। जिस पर केंद्रीय मंत्री गडकरी ने अविलंब कार्य कराये जाने की घोषणा व बजट के प्रावधान का पत्र भेजा है।
पत्र में लिखा है कि सांस्कृतिक राजधानी अयोध्या के आसपास क्षेत्रों बस्ती, गोंडा, बाराबंकी से होकर गुजरती है। इस पथ पर मोक्षदायिनी सरयू समेत अन्य पौराणिक नदियों पर समेटे काफी विस्तृत भूभाग में फैली है।
इस पथ पर परिक्रमार्थियों एवं श्रद्धालुओं को दो स्थानों पर बस्ती जिले के दुबौलिया स्थित किताउल मांझा से फैजाबाद जनपद के श्रृंगी ऋषि आश्रम शेरवाघाट तथा बाराबंकी जनपद में मूरतिहन घाट से पड़ोसी जनपद गोंडा के कमरियन घाट पर पहुंचने के लिए सरयू नदी पार करनी पड़ती है।
जिससे परिक्रमार्थियों एवं श्रद्धालुओं को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। इस पुल के बन जाने से दूरी कम होगी और श्रद्धालुुओं एवं परिक्रमार्थियों को सुविधा होगी।
फोरलेन के बगल चलने के लिए परिक्रमार्थियों एवं श्रद्धालुओं के लिए पैदल पथ व चौरासी कोसी परिक्रमा में पड़ने वाले ऋषि, महर्षियों, तपोस्वियों तथा मंदिरों व आश्रमों की संकेतक पट्टी लगाने व पड़ाव स्थलों पर रैन बसेरा बनाने तथा परिक्रमा पथ के किनारे गर्मी और धूप से बचने के लिए रामायणकालीन वृक्षों जैसे नीम, बरगद, पीपल, आम व महुआ आदि का पौधरोपण कराने की मांग पत्र में की गयी है।
सांसद ने कहा कि वर्तमान में चौरासी कोसी परिक्रमा पथ गड्डा युक्त हो गया है। जिस पर परिक्रमार्थियों व श्रद्धालुओं को चलने में बहुत कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। फोरलेन बनने से अयोध्या की चौरासी कोसी परिक्रमा अपनी पुरानी विरासत को पुन: हासिल कर लेगी और इस चौरासी कोसी परिक्रमा के बारे में देश दुनिया के लोग भी जान सकेंगे।