रोज 60 रुपये के लिए तय करते थे 60 किलोमीटर की दूरी
अयोध्या। साहब रोज 60 रुपये के लिए साइकिल से 60 किलोमीटर की दूरी तय करता था, अब परिवार का गुजर-बसर कैसे होगा, मनमाने तरीके से हमें बाहर कर दिया है। यह दर्द है साकेत महाविद्यालय के निष्कासित चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी मिल्कीपुर निवासी रामधीरज का। कुछ इस तरह का दर्द साकेत महाविद्यालय प्रबंधन द्वारा निकाले गए सभी 22 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों का है। इनके समक्ष अब रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
साकेत महाविद्यालय में 22 दैनिक कर्मचारियों को हटा दिया गया है। महाविद्यालय ने कर्मचारियों को बाहर करने के पीछे निरंतर घटती छात्र संख्या व संसाधनों की कमी कारण बताया है। वहीं महाविद्यालय में दशकों से कार्यरत कर्मियों ने महाविद्यालय पर मनमाने ढंग से कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। 1988 से महाविद्यालय में लिपिक के पद पर कार्यरत रहे संजय पांडेय ने कहा कि यह फरमान मनमाना है, हम इसके विरोध में उच्च न्यायालय की शरण में जाएंगे। 1996 से चपरासी के पद पर कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मी रामविलास तो बहुत परेशान हैं, कहते हैं कि प्रबंधन के इस निर्णय ने तो रोजी रोटी पर प्रहार करने का काम किया है। अब घर का खर्चा कैसे चलेगा। वहीं 1998 से कार्यरत रामसजीवन यादव ने कहा कि 20 वर्षों से काम कर रहे कर्मियों को निकालने को लेकर महाविद्यालय प्रबंधन ने एक बार भी नहीं सोचा। दूसरी तरफ साकेत महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अजय मोहन श्रीवास्तव का कहना है कि उन्होंने तो बस 26 फरवरी को हुई प्रबंध समिति की बैठक में कर्मचारियों को हटाने के लिए गए निर्णय का अनुपालन कराया है, इसके आगे वह कुछ भी बोलने को तैयार नहीं।
उपश्रमायुक्त से कार्रवाई की मांग
साकेत महाविद्यालय प्रबंधन द्वारा निकाले गए 22 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों ने श्रम न्यायालय में आवेदन कर न्यूनतम वेतन दिलाने के लिए आवेदन कर रखा है। कर्मचारियों का कहना है कि करीब 20 से 30 वर्षों से वे पूर्ण निष्ठा से काम करते थे। पद पर कार्य करते हुए कर्मचारियों को 60 रुपये प्रतिदिन की दर से अवकाश कटौती के बाद भुगतान किया जाता था। दो माह का भुगतान अभी भी बकाया है। कर्मचारियों का आरोप है कि महाविद्यालय प्रबंधन ने 6 मार्च को सभी 22 कर्मचारियों को सेवा से मुक्त कर दिया है। इस प्रकरण को लेकर कर्मचारियों ने उपश्रमायुक्त फैजाबाद को ज्ञापन सौंपकर कर्मचारियों के हित में निर्णय लेने की अपेक्षा की है।