चारों तरफ बाढ़ के कहर से गृहस्थी बचाने की जद्दोजहद
फैजाबाद। बाढ़ के कहर से सरयू/घाघरा के कक्षारीय इलाकों में गांव के गांव पलायन हो रहे हैं। पाई-पाई जुटाकर बनाए गए आशियाने को सरयू की तेज धारा अपना निवाला बना रही है। पूरा बाजार इलाके के पिपरी संग्रामपुर गांव का अस्तित्व खत्म होने के कगार पर है।
बाढ़ में फंसे ग्रामीण अपने टूटते और बिखरते सपनों को देखने को मजबूर हो रहे हैं। साथ ही गृहस्थी और जरुरी सामानों को बचाने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है। जबकि रुदौली के कैथी माझा से पलायन करने वाले बाकी बचे नौ घरों के बचने की उम्मीद छोड़ चुके हैं।
राहत सामग्रियों के नाम बड़ा खेल चल रहा है और सरकारी दावे कागजों तक ही सिमटे है। बाढ़ पीड़ित व पिपरी के निवासी वयोवृद्ध लालता बताते हैं कि बाढ़ से सुरक्षित जगहों पर आने-जाने की कोई व्यवस्था नहीं है और न ही कोई अधिकारी व नेता उनकी हाल-सुध ले रहा है।
पूरा बाजार के ही गांव मूड़ाडीहा से डेढ़-दो सौ लोगों का पलायन हो चुका है। यहां के राम सुमिरन कहते हैं कि नदी की मुख्य धारा गांव से सटकर बहने लगी है। दर्जनों घर नदी के आगोश में समा चुके हैं और लोग बिल्वहरि बंधे पर शरण लिये हैं।
गांव सलेमपुर में 25-30 घरों व पूरे चेतन गांव में 30-40 घर नदी में समा चुके हैं। पूरे चेतन के रामजी कहते हैं कि अब नदी की धारा उनके घर से चंद कदम तक पहुंच गई है। बताया जा रहा है कि रामजी के घर से आगे पांच सौ मीटर आगे तक सीसी सड़क बनी हुई थी। जिसे काटकर नदी ने मेन धारा में शामिल कर लिया है।
ऐसे ही गांव उड़दहवा के प्राथमिक विद्यालय के नजदीक नदी की धारा पहुंच गई है। यहां स्कूल के बगल तुलसीराम का घर बाढ़ की चपेट में आ गया तो परिवार समेत पंचायत घर में ठहरना पड़ा। गनीमत कि आगे पिपरी गांव से धारा मुड़ गई। फिलहाल, राजापुर और मड़ना गांव के आंशिक हिस्से भी बाढ़ की चपेट से बच नहीं सके हैं।
बाढ़ आई पखवारा बीता, नहीं मिली राहत सामग्री
मूड़ाडीहा गांव के अमर प्रताप, निरगुन व डॉ. एसएन कनौजिया बताते हैं कि यहां बाढ़ आए पखवारा बीत रहा है लेकिन प्रशासन की ओर से कोई राहत सामग्री नहीं पहुंची है। पीड़ित अनीता यादव का कहना है कि कोई अधिकारी गांव पूछे तक नाहीं आवा।
राहत के नाम पर बंटा मिट्टी का तेल
प्रशासन की ओर से यहां बाढ़ की रिपोर्ट देने के लिए लेखपालों की फौज उतारी गई है। इनमें हल्का लेखपाल सूर्यभान के अलावा राम नरायन, रामदेव, अंजनी पांडेय, राम तिलक, दिनेश पांडेय व ओमप्रकाश सिंह हैं।
हल्का लेखपाल ने बताया कि पीड़ित ग्रामीणों को तीन-तीन लीटर मिट्टी का तेल बांटा गया है। वहीं बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि पखवारे भर से बाढ़ के चलते बिजली नदारद रही और मिट्टी का तेल तीन दिन पहले दिया गया था।
रुदौली के 2700 परिवार झेल रहे बाढ़
शुजागंज। घाघरा का जलस्तर बढ़ने से रुदौली तहसील क्षेत्र के 400 घरों में पानी घुस गया है। कुल 27 सौ परिवार इस बाढ़ के पानी मे जान जोखिम डाल कर रहने को मजबूर हैं।
रुदौली के सल्लाहपुर गांव में 100 घर जिसकी आबादी 400, अब्बूपुर गांव में 50 घर 300 लोग, सरायनासिर में 40 घर 300 लोग, मुजेहना गांव में 40 परिवारों के 350 लोग, महंगू का पुरवा के 100 घरों के 700 लोग बाढ़ से परेशान हो पलायन कर रहे हैं।
घाघरा का जलस्तर बढ़ने से यहाँ के ग्रामीणों को दुश्वारियों के साथ जीवन व्यतीत करना पड़ रहा है। स्थानीय प्रशासन अभी तक केवल कैथी मांझा के ग्रामीणों प्लास्टिक की पन्नी ही राहत के नाम पर दे पाया है।
महगू का पुरवा के लिए आने जाने के लिए एक नाव भी नहीं उपलब्ध है। ग्रामीण अपनी जान जोखिम डाल कर गाँव से रौनाही तटबंध की सड़क शरण लिए हैं।
स्वास्थ्य टीम बंधों पर पहुंची, बांटी दवाएं
शुजागंज। रुदौली सीएचसी की टीम गुरुवार को बाढ़ प्रभावित गाँवों में दवाओं का वितरण करने निकली। मगर बंधे पर ही दवाएं बांटनी पड़ी। सीएचसी प्रभारी डॉ. अजय मोहन की मौजूदगी में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दवाओं का वितरण किया। जिसमें क्लोरीन की गोलियां, पैरासिटामॉल आदि दवाएं दी गईं। महंगू का पुरवा, संडरी, कैथी, सल्लाहपुर, अब्बूपुर के ग्रामीणों ने चेकअप करवा कर दवाएं लीं।