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आचार संहिता हटते ही किसानों का माफ होगा 13 करोड़

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आचार संहिता हटते ही किसानों का माफ होगा 13 करोड़
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अयोध्या। लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने से जिले में किसानों की 13 करोड़ कर्ज माफी फंस गई है। कुल 75 सौ किसानों ने बीते दिनों हेल्प डेस्क में शिकायत की थी। इसके बाद कराई गई जांच में करीब चार हजार किसान पात्र पाए गए हैं। जिला स्तरीय कमेटी की ओर से ऋणमाफी की स्वीकृति भी दे दी गई है। शासन स्तर पर मामला लंबित है। विभागीय अधिकारी चुनाव के बाद भुगतान का दावा कर रहे हैं।

भाजपा ने विधानसभा चुनाव में किसानों के एक लाख तक के कर्ज को माफ करने का एलान किया था। सरकार बनने के बाद प्राथमिकता से अमल हुआ। इस योजना से जिले के 72 हजार 592 किसान चिह्नित किए गए थे। सरकार की ओर से पात्रता निर्धारित करने के बाद इनमें से बहुत से किसान वंचित हो गए।
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जिसमें प्रमुख कारण ऋण खाते का नवीनीकरण न होना, देय धनराशि मार्च 2016 तक शून्य होना, ऋण खातों पर आधार फीड न होना, चार हेक्टेयर से अधिक की भूमि होना, एक ही जमीन पर दो या अधिक बैंकों से ऋण होना, अभिलेख पूर्ण न होना, ऋण लिए गए गाटों की उस समय जांच न हो पाना आदि रहे।

अब तक करीब पांच चरणों में 58 हजार किसानों का कुल 260 करोड़ कर्ज माफ किया गया है। तकनीकी दांवपेंच के कारण पात्र होते हुए अपात्र की श्रेणी में रहे किसानों के लिए सरकार ने ऑनलाइन शिकायतें मांगी और ऑनलाइन पोर्टल संचालित किया। जिनके निस्तारण के बाद कई और पात्र किसानों को लाभान्वित किया गया।

इन सबके बावजूद भी कई किसान पात्र होते हुए भी बैंक की गलती से देयता गलत भरने, आधार न होने, नामिनी न होने आदि की वजह से कर्जमाफी का लाभ न पा सके। ऐसे किसान लंबे समय से बैंक से लेकर जिले के उच्च अधिकारियों सहित शासन-प्रशासन तक चक्कर काट रहे थे। कुछ कृषकों का ऋण गैर जनपद से स्वीकृत होने के फेर में भी कर्जमाफी से वंचित हो गए थे।

इन तमाम कारणों से कर्जमाफी को लेकर सरकार की किरकिरी भी शुरू हो गई थी। इन्हीं मामलों पर गंभीरता से विचार करते हुए सरकार ने जिला मुख्यालय पर हेल्प डेस्क बनाने का फरमान जारी किया। पांच दिसंबर से 21 जनवरी तक कुल 7500 शिकायतें किसानों ने दर्ज कराई। प्राप्त शिकायतों का मैनुअल सत्यापन कराया गया।

जिसके बाद चार हजार और किसान पात्रता की श्रेणी में आए हैं। जिनका 13 करोड़ रुपया जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा स्वीकृत किया गया है। पटल प्रभारी विवेक दूबे ने बताया कि इनमें अधिकांश शिकायतें नामिनी न होने, बैंक द्वारा देयता गलत भरने सहित आदि की थीं। जिनके जांचोपरांत देयता निर्धारित करके सूची शासन को प्रेषित की गई है।
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आचार संहिता लग जाने के कारण उक्त सूची का शासन स्तर पर ही लंबित है। आचार संहिता हटते ही कर्जमाफी की जाएगी। जिला कृषि अधिकारी अयोध्या बीके सिंह ने कहा कि हेल्प डेस्क पर 21 जनवरी तक कुल 75 सौ शिकायतें प्राप्त हुई थीं। मैनुअल सत्यापन के बाद इनमें से चार हजार किसान ऋणमाफी का लाभ पाने के लिए पात्र पाए गए हैं। इन्हें सूचीबद्ध करके जिला स्तरीय समिति की ओर से अनुमोदन हो चुका है, आचार संहिता की वजह से भुगतान रुका हुआ है।
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