फैजाबाद। शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में हुई गड़बड़ी पर चल रही सुनवाई के बाद बृहस्पतिवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ की ओर से दिए गए आदेश का दंश जिले के 687 शिक्षकों को भुगतना पड़ेगा। इनमें से 579 को हाल ही में संपन्न हुई शिक्षक भर्ती प्रक्रिया 68500 व 108 को 12460 के तहत नियुक्ति दी गई थी।
प्रदेश सरकार ने निजाम बदलने के बाद परिषदीय स्कूलों में रिक्त पड़े सहायक अध्यापकों के पदों को भरने के लिए 68500 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी किया था। इस विज्ञापन के तहत शुरुआती दौर में एक हजार पद आवंटित किए गए थे जिसे बाद में कम करते हुए 600 कर दिया था। इसके सापेक्ष लंबे समय तक चली भर्ती प्रक्रिया पूरी करने के बाद तीन सितंबर को 585 अभ्यर्थियों में से 579 को नियुक्ति पत्र दिया गया था।
वहीं वर्ष 2016 में शुरू हुई 12460 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में बीटीसी/विशिष्ट बीटीसी/बीएलएड प्रशिक्षण उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की प्रथम काउंसलिंग कराई जा चुकी थी। नई सरकार बनने पर सभी भर्तियों पर रोक लगा दी गई। इसके बाद हाईकोर्ट की शरण में जाने के बाद उच्च न्यायालय ने हरी झंडी दिखाई तो जिले में 108 नियुक्तियों का रास्ता साफ हुआ।
दो मई को डीएम की मौजूदगी में 108 के सापेक्ष 101 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र सौंपा गया। दोनों भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कुछ लोगों ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। दोनों प्रकरणों में सुनवाई के बाद कोर्ट ने बृहस्पतिवार को जहां 68500 सहायक अध्यापक भर्ती प्रक्रिया की सीबीआई जांच कराने व 12460 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को रद्द करने का आदेश जारी किया।
कोर्ट के इस आदेश से दोनों भर्ती प्रक्रिया के तहत जिले में नियुक्ति पाने वाले 687 शिक्षक सकते में हैं। मामले में प्रभारी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संजय गुप्ता ने बताया कि शासन से अभी तक नियुक्तियों के संबंध में कोई दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है।